अल्बर्टा में अलगाव पर वोटिंग से पहले कार्नी ने भारतवंशियों से की कनाडा के साथ रहने की अपील
अल्बर्टा में 19 अक्टूबर 2026 को होने वाले मतदान से पहले प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारतीय समुदाय से अखंड कनाडा के पक्ष में खड़े होने को कहा है।
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उत्तर अमेरिका का सबसे बड़ा देश कनाडा इस वक्त एक ऐसे संवैधानिक और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है, जैसा पहले नहीं देखा गया। देश का सबसे अमीर प्रांत अल्बर्टा (Alberta), जो तेल और नैचुरल गैस के भंडार से भरा है, कनाडा से अलग होकर अपना स्वतंत्र देश बनाने की दहलीज पर खड़ा है। इस अलगाववादी आंदोलन को रोकने और देश का बंटवारा टालने के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने सीधे भारतीय मूल के लोगों का रुख किया है।
कार्नी कनाडा की एकता का संदेश देने और भारतीय समुदाय को अपनी तरफ करने के लिए बार-बार भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दोनों देशों के बीच संभावित व्यापार समझौतों का जिक्र कर रहे हैं।
अल्बर्टा में 19 अक्टूबर 2026 को एक ऐतिहासिक मतदान हो रहा है। यह वोटिंग एक रात में नया देश बनाने के बारे में नहीं है। सवाल यह है कि प्रांतीय सरकार कनाडा के संघ से बाहर निकलने की आधिकारिक कानूनी प्रक्रिया शुरू करे या नहीं। अगर इस वोटिंग में अलग होने के पक्ष में बहुमत मिला, तो यह कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा संवैधानिक झटका होगा।
इसी वजह से प्रधानमंत्री कार्नी ने पंजाबी भाषी और भारतीय समुदाय में बेहद लोकप्रिय रेडिएफएम कैलगरी (RED FM Calgary) रेडियो स्टेशन पर सीधी बातचीत की। उन्होंने भारतीय मूल के नागरिकों से अखंड कनाडा के पक्ष में मजबूती से खड़े होने की अपील की।
अल्बर्टा में अलग देश की मांग के पीछे लंबे वक्त से जमा नाराजगी और मजबूत आर्थिक ताकत, ये दो बड़ी वजहें बताई गई हैं। ऑइल डैशबोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अल्बर्टा में करीब 165 अरब बैरल तेल का भारी भंडार है। प्रांत के अलगाववादी नेताओं का तर्क है कि कनाडा की राजधानी ओटावा (Ottawa) अल्बर्टा के संसाधनों और तेल की कमाई से अरबों डॉलर टैक्स के रूप में वसूलती है, लेकिन बदले में प्रांत को नीतिगत फैसलों और केंद्रीय राजनीति में सही अहमियत नहीं देती।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि संघीय सरकार की सख्त पर्यावरण नीतियों और पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स पर लगाई गई पाबंदियों से अल्बर्टा के ऊर्जा सेक्टर को बड़ा नुकसान हुआ है। वहां के एक तबके में यह भावना बनी है कि इस आर्थिक शोषण और केंद्र की अनदेखी से निकलने के लिए अपनी अलग पहचान और स्वायत्तता चाहिए। इसी वजह से इस साल की शुरुआत में अलगाव पर जनमत संग्रह की मांग करने वाली याचिका पर करीब 3 लाख नागरिकों ने दस्तखत किए थे। इप्सॉस (Ipsos) के सर्वे के मुताबिक करीब 28 फीसदी स्थानीय नागरिकों ने कनाडा से अलग होने का समर्थन किया था।
अल्बर्टा की राजनीति में भारतीय मूल के लोग निर्णायक भूमिका में हैं। 2021 की कनाडाई जनगणना के मुताबिक अल्बर्टा में करीब 2,98,000 दक्षिण एशियाई मूल के लोग रहते हैं, जिनमें ज्यादातर भारतीय हैं, खासकर पंजाबी समुदाय के। पिछले पांच साल में ही 31,800 से ज्यादा नए भारतीय नागरिक इस प्रांत में बसे हैं, जो कुल नए प्रवासियों का 16 फीसदी हैं। कैलगरी और एडमंटन जैसे बड़े शहरों में भारतीय मतदाताओं का दबदबा है।
कार्नी को साफ पता है कि अगर भारतीय मूल के मतदाताओं ने कनाडा की अखंडता के पक्ष में वोट दिया, तो अलगाववादियों का सपना आसानी से टूट सकता है। रेडियो बातचीत में रेडियो होस्ट ऋषि नागर ने भी कहा कि अल्बर्टा के ज्यादातर भारतीय मूल के लोग एक स्थिर, सुरक्षित और अखंड कनाडा में रहना ही पसंद करते हैं। साथ ही वोटिंग में शामिल कुछ प्रस्तावों का सीधा असर नए प्रवासियों, भारतीय छात्रों और अस्थायी कामगारों के स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकारों पर पड़ सकता है। इसलिए भारतीय समुदाय कनाडा के साथ रहने को अपने भविष्य के लिए सुरक्षित मान रहा है।
अल्बर्टा के लोगों और भारतीय समुदाय को मनाने के लिए कार्नी ने भारत के साथ आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों का कार्ड इस्तेमाल किया है। उन्होंने बताया कि भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर तेजी से बातचीत चल रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर 2026 में दो दिन के कनाडा दौरे पर आ रहे हैं, और इसे दोनों देशों की दोस्ती के नए दौर का संकेत बताया।
कार्नी का मुख्य तर्क यह है कि अल्बर्टा तेल और नैचुरल गैस का विशाल उत्पादक है। अगर अल्बर्टा कनाडा का हिस्सा रहा, तो ट्रांस माउंटेन पाइपलाइन के जरिए तेल वैंकूवर बंदरगाह तक पहुंचाकर एशिया के सबसे बड़े बाजार भारत को बेचना बहुत आसान होगा। तेजी से बढ़ती भारत जैसी महाशक्ति को ऊर्जा की बड़ी जरूरत है। लेकिन कनाडा से अलग होने पर अल्बर्टा चारों तरफ जमीन से घिरा (Landlocked) देश बन जाएगा, और तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल बेचना या व्यापार समझौते करना प्रांत के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा।
यानी कार्नी ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का सहारा लेकर अल्बर्टा के नागरिकों और भारतीय समुदाय को यही समझाने की कोशिश की है कि कनाडा से अलग होने में सिर्फ नुकसान है, जबकि अखंड कनाडा में रहकर भारत जैसी महाशक्ति से व्यापार करने में ही सबका भविष्य सुरक्षित है।
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