अक्टूबर में त्योहारी मांग से ट्रकों का भाड़ा और गाड़ियों की बिक्री चढ़ी
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दिवाली से पहले माल ढुलाई की मांग और गाड़ियों की खुदरा बिक्री बढ़ने से अक्टूबर में भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर को रफ्तार मिली।
दिवाली से पहले त्योहारों के सीजन में माल ढुलाई की मांग बढ़ी और गाड़ियों की खुदरा बिक्री भी लगभग हर तरफ चढ़ी। इसी वजह से अक्टूबर के महीने में भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर को अच्छी रफ्तार मिली। इससे देश में खपत और माल ढुलाई के मोर्चे पर सकारात्मक हालात के संकेत मिल रहे हैं।
त्योहारी मांग के चलते ट्रकों का भाड़ा मजबूत बना रहा। जिन मुख्य रूटों पर नजर रखी जाती है, उन सब पर सालाना आधार पर भाड़ा बढ़ा। सबसे ज्यादा 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिल्ली-कोलकाता-दिल्ली रूट पर हुई। बेंगलुरु-मुंबई-बेंगलुरु रूट पर 12 प्रतिशत और कोलकाता-गुवाहाटी-कोलकाता रूट पर 9 प्रतिशत का इजाफा दर्ज हुआ। बाकी रूटों पर भाड़ा 4 से 7 प्रतिशत चढ़ा। पिछले महीने के मुकाबले भी भाड़ा टिका रहा। बेंगलुरु-मुंबई-बेंगलुरु रूट पर 2 प्रतिशत और दिल्ली-चेन्नई-दिल्ली रूट पर 1.4 प्रतिशत की बढ़त रही।
हालांकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR में BS IV ट्रकों की एंट्री पर रोक से ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों को परेशानी झेलनी पड़ी। इस रोक की वजह से सीमा पर उलझन का माहौल बन गया।
अक्टूबर में दोपहिया गाड़ियों की बिक्री जोरदार रही। मोटरसाइकिल और स्कूटर की बिक्री पिछले महीने के मुकाबले 29 प्रतिशत बढ़ी। दिवाली से पहले की त्योहारी खरीदारी को बल मिला और सभी तरह की गाड़ियों में यह सबसे बड़ी बढ़त रही।
कारों और कंस्ट्रक्शन उपकरणों की बिक्री भी बढ़ी। मोटर कारों की बिक्री पिछले महीने से 17 प्रतिशत ऊपर गई। कंस्ट्रक्शन उपकरणों की बिक्री में 25 प्रतिशत और अर्थमूविंग उपकरणों की बिक्री में 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। कंस्ट्रक्शन उपकरणों की बिक्री सालाना आधार पर भी 21 प्रतिशत बढ़ी।
दूसरी श्रेणियों में तीनपहिया मालवाहक गाड़ियों और खेती के ट्रेलरों की बिक्री पिछले महीने के मुकाबले हर एक में 20 प्रतिशत बढ़ी। कमर्शियल ट्रैक्टरों की बिक्री 15 प्रतिशत और मालवाहक गाड़ियों की बिक्री 11 प्रतिशत चढ़ी। दूसरी ओर मैक्सी कैब की बिक्री 11 प्रतिशत और बसों की बिक्री 2 प्रतिशत घट गई।
सालाना आधार पर गाड़ियों की बिक्री की तस्वीर मिली-जुली रही। पिछले साल अक्टूबर में त्योहारी सीजन के दौरान बिक्री अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची थी, इसलिए इस बार की तुलना ऊंचे आधार से हुई। तीनपहिया मालवाहक गाड़ियों की बिक्री में सबसे ज्यादा 25 प्रतिशत की बढ़त हुई। बसों की बिक्री 14 प्रतिशत और खेती के ट्रैक्टरों की बिक्री 7 प्रतिशत बढ़ी।
इसके उलट मोटरसाइकिल और स्कूटर की बिक्री 28 प्रतिशत, कमर्शियल ट्रैक्टर की 24 प्रतिशत, मोटर कारों की 15 प्रतिशत, अर्थमूविंग उपकरणों की 12 प्रतिशत और खेती के ट्रेलरों की 11 प्रतिशत घटी। मालवाहक गाड़ियों की बिक्री में भी मामूली गिरावट दर्ज हुई।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री में सालाना आधार पर तेज बढ़त जारी रही। इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 115 प्रतिशत बढ़ी, यानी दोगुने से भी ज्यादा हो गई। इलेक्ट्रिक तीनपहिया की बिक्री 93 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक दोपहिया की 62 प्रतिशत चढ़ी। पिछले महीने के मुकाबले इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री 8 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक तीनपहिया की 5 प्रतिशत बढ़ी। इससे साफ है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
इन आंकड़ों पर श्रीराम फाइनेंस के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (कमर्शियल व्हीकल्स) सुदर्शन होल्ला ने कहा, "अक्टूबर महीने में त्योहारी सीजन की माल ढुलाई की वजह से ट्रकों का भाड़ा बहुत मजबूत रहा। उम्मीद है कि नवंबर के पहले पंद्रह दिनों तक यह रफ्तार बनी रहेगी। NCR में BS IV ट्रकों की एंट्री पर रोक की वजह से ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों को दिक्कत हो रही है। दोपहिया, पैसेंजर कार और कंस्ट्रक्शन उपकरणों की बिक्री में पिछले महीने के मुकाबले दमदार बढ़त हुई है। इस महीने दिवाली है, इसलिए बिक्री की यह रफ्तार बनी रहने की संभावना है।"
अक्टूबर में ईंधन की खपत भी बढ़ी। पेट्रोल की खपत पिछले महीने से 4 प्रतिशत और डीजल की खपत 20 प्रतिशत बढ़ी। त्योहारों के दौरान बढ़ी माल ढुलाई इसकी मुख्य वजह रही। सालाना आधार पर पेट्रोल की खपत 3.1 प्रतिशत और डीजल की खपत 11.7 प्रतिशत बढ़ी।
FASTag की वसूली में भी सुधार दिखा। पिछले महीने के मुकाबले FASTag लेन-देन की संख्या 1 प्रतिशत और वसूली गई रकम की कीमत 2.3 प्रतिशत बढ़ी। लेकिन सालाना आधार पर लेन-देन की संख्या में 6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि वसूली गई रकम की कीमत में 9 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।
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