गोधनी रोड हादसे में महिला की मौत के बाद NMC का रात में बुलडोजर, शेड तोड़े गए
मंगलवार शाम टिपर ट्रक की चपेट में आई अश्विनी फालके की मौत के कुछ घंटे बाद नागपुर महानगरपालिका ने गोधनी रोड पर अतिक्रमण के खिलाफ रात में कार्रवाई की।
नागपुर के गोधनी रोड पर मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ। त्योहार की खरीदारी करने निकलीं युवा माँ अश्विनी फालके टिपर ट्रक के नीचे आ गईं और उनकी मौत हो गई। इस हादसे के बाद प्रशासन को वह बात याद आई, जिसकी शिकायत शहर के लोग सालों से करते आ रहे हैं। सड़कों पर फैला अतिक्रमण रोज़ के सफ़र को जानलेवा बना रहा है।
खबर है कि नागपुर सुधार प्रन्यास (NIT) की ओर से कार्रवाई न होने से नागपुर महानगरपालिका (NMC) नाराज़ थी। हादसे के कुछ ही घंटे बाद NMC ने रात में अतिक्रमण हटाने की आपात मुहिम चलाई। रात 8.30 बजे से 11.15 बजे तक NMC के प्रवर्तन दस्ते ने मानकापुर पुलिस स्टेशन के इलाके में आने वाले इस 18 मीटर चौड़े मुख्य रोड पर JCB मशीनें उतारीं। अवैध दुकानों के बढ़ाए हुए हिस्से और शेड तोड़े गए।
सहायक आयुक्त (प्रवर्तन) संजय कांबले ने माना कि अवैध अतिक्रमण की वजह से गोधनी रोड काफ़ी तंग हो गया है। यह रोड बीच में डिवाइडर के साथ 18 मीटर चौड़ी सड़क के हिसाब से बनी है। आरोप है कि प्रॉपर्टी मालिकों ने ग्राउंड फ्लोर को दुकानों में बदल दिया और पार्किंग के लिए छोड़ी गई जगह पर बिना इजाज़त शेड खड़े कर दिए।
इसका नतीजा यह हुआ कि ग्राहक अपनी गाड़ियाँ सीधे मुख्य सड़क पर खड़ी करने लगे। चलता ट्रैफिक एक बहुत संकरी जगह से निकलने को मजबूर हुआ और पैदल चलने वाले तेज़ रफ़्तार और भारी गाड़ियों के सामने खुले रह गए।
रात की कार्रवाई में दस्ते ने सात से आठ अनधिकृत शेड गिराए। इनमें 600 वर्ग फ़ुट का एक बड़ा ढाँचा भी था, जो पूरी तरह पार्किंग की जगह पर बना था। खबर के मुताबिक कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने कड़ा विरोध किया।
रात की इस कार्रवाई के बावजूद मुहिम अभी पूरी नहीं हुई है। कांबले ने बताया कि तोड़फोड़ बुधवार को फिर शुरू करने की योजना थी। लेकिन यह रोड NIT के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए उस एजेंसी के साथ तालमेल ज़रूरी है। खबर है कि मानकापुर पुलिस ने कानून-व्यवस्था की दिक्कत से बचने के लिए दुकानदारों को अपने अवैध ढाँचे खुद हटाने के लिए एक दिन की मोहलत माँगी है।
यानी जानलेवा हादसे के बाद भी अधिकार क्षेत्र का पेच, तालमेल की बैठकें और खुद हटाने की गुज़ारिश जारी है, और अतिक्रमण को एक और मौका मिल गया है।
गोधनी रोड का यह हादसा अकेला मामला नहीं है। सीताबर्डी, जरीपटका, धरमपेठ, झिंगाबाई टाकली, गांधीबाग और इतवारी जैसे इलाकों में भी दुकानें फुटपाथ, पार्किंग के किनारे और सड़क की जगह घेर लेती हैं। पैदल लोग सड़क पर चलने को मजबूर होते हैं, गाड़ीवालों को तंग रास्तों से निकलना पड़ता है और कार्रवाई करने वाले अफ़सर तब तक नज़र नहीं आते, जब तक कोई हादसा सुर्खियों में न आ जाए।
अब सवाल यह है कि यह कार्रवाई हादसे से पहले क्यों नहीं हुई। अगर अवैध ढाँचे दिख रहे थे, पार्किंग की जगह पर कब्ज़ा साफ़ था और सड़क खतरनाक तरीके से सिकुड़ चुकी थी, तो अफ़सरों को पहले कार्रवाई करने से किसने रोका? असरदार जवाब तब होगा जब पूरे शहर में लगातार और सख़्त मुहिम चले, न कि लोगों के गुस्से के बाद चुनिंदा जगह तोड़फोड़ हो।
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