अकोला के 31 पूर्व विधायकों को पेंशन, दो को सबसे ज्यादा 72 हजार रुपये महीना
अकोला जिले के 31 पूर्व विधायकों को सरकार से पेंशन मिल रही है। न्यूनतम पेंशन की व्यवस्था को 2026 में नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है।
अकोला जिले के 31 पूर्व विधायकों को इस वक्त सरकार से पेंशन मिल रही है। विधानसभा और विधान परिषद के पूर्व विधायकों को सरकार की तरफ से यह पेंशन दी जाती है।
नियम यह है कि कम से कम एक कार्यकाल पूरा करने वाले पूर्व विधायक को हर महीने 50 हजार रुपये से पेंशन शुरू होती है। अतिरिक्त कार्यकाल के हिसाब से रकम बढ़ती जाती है। इसी वजह से हर पूर्व विधायक को मिलने वाली रकम उसके कार्यकाल के मुताबिक अलग-अलग है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अकोला जिले के इन 31 पूर्व विधायकों की पेंशन पर सरकार का हर महीने लाखों रुपये का खर्च होता है। सभी 31 को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति माह मानकर चलें तो यह खर्च महीने का कम से कम 1 करोड़ 55 लाख रुपये और साल का कम से कम 18 करोड़ 20 लाख रुपये बैठता है। असली खर्च इससे ज्यादा है, क्योंकि अतिरिक्त कार्यकाल की वजह से कुछ को बढ़ी हुई पेंशन मिलती है। रिकॉर्ड में दर्ज है कि कुछ पूर्व विधायकों को 50 हजार से ज्यादा पेंशन मिल रही है।
इस बीच, पूर्व विधायकों को दी जाने वाली 50 हजार रुपये महीने की न्यूनतम पेंशन की व्यवस्था को 2026 में नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। इस मामले से विधायकों की पेंशन की नीति पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
सरकारी नियम के मुताबिक पेंशनधारक की मौत के बाद उसकी पत्नी को आधी पेंशन दी जाती है। जिले में पेंशन पाने वाले 10 पूर्व विधायक अब नहीं रहे, और उनकी पत्नियों को आज की तारीख में फैमिली पेंशन के तौर पर आधी पेंशन मिल रही है।
जिले में एक नेता ऐसे भी हैं जिन्हें विधायक और सांसद, दोनों की पेंशन मिलती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय धोत्रे मूर्तिजापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे और बाद में सांसद भी बने। आज वे दोनों पेंशन के हकदार हैं। जिले में वे इकलौते ऐसे पूर्व सांसद हैं।
सबसे ज्यादा पेंशन दो पूर्व विधायकों को मिल रही है। इनमें अकोट विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सुधाकर गणगणे और अकोला विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक अजहर हुसेन शामिल हैं। दोनों को हर महीने 72 हजार रुपये पेंशन दी जाती है। वहीं विधान परिषद से तीन बार विधायक रहे गोपीकिसन बाजोरिया को 70 हजार रुपये पेंशन मिलती है।