अकोला में जब्त हुई गाड़ियों में से सिर्फ 70 मालिकों को लौटीं, जुर्माने के बाद भी इंतज़ार
अकोला में पुलिस और आरटीओ ने कई गाड़ियां जब्त की हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 70 गाड़ियां ही उनके मालिकों को वापस दी गई हैं।
अकोला में ट्रैफिक नियम तोड़ने, कागज़ात पूरे न होने या दूसरी वजहों से पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने बड़ी संख्या में गाड़ियां जब्त की हैं। लेकिन इनमें से अब तक सिर्फ 70 गाड़ियां ही असली मालिकों को लौटाई गई हैं।
शहर के हर पुलिस स्टेशन, शहर ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ और एसपी कार्यालय में कई वजहों से चारपहिया, दोपहिया, तीनपहिया और भारी गाड़ियां जब्त पड़ी हैं। इन्हें छुड़ाने के लिए गाड़ी के कागज़ात न होने या अदालती प्रक्रिया की वजह से गाड़ी मालिकों को बेवजह परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार कागज़ात पेश न कर पाने से गाड़ियां धूल खाती रहती हैं और आखिर में कबाड़ में चली जाती हैं।
पुलिस जब कोई गाड़ी जब्त करती है तो पहले पंचनामा बनाकर उसकी एंट्री दर्ज की जाती है। इसके बाद गाड़ी छुड़ाने के लिए मालिक को ज़रूरी कागज़ात जमा करने पड़ते हैं।
इस दौरान आरसी, बीमा और वैध ड्राइविंग लाइसेंस समेत ज़रूरी कागज़ात की जांच होती है। उस मामले का जुर्माना या शुल्क भरने के बाद गाड़ी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू होती है। फिर भी सिर्फ जुर्माना भर देने से हर मामले में गाड़ी तुरंत मिल जाए, ऐसा नहीं है। अगर किसी गाड़ी पर अपराध या अदालती मामला लंबित है तो संबंधित अदालत का आदेश ज़रूरी होता है। गाड़ी मालिक मौजूद न हो या कागज़ात में कमी हो, तब भी प्रक्रिया अटक सकती है।
जब्त गाड़ियों पर नीलामी की तलवार लटकी रहती है। कई गाड़ियां किसी अपराध में जब्त होती हैं, तो कुछ चोरी हुई होती हैं। अपराध में इस्तेमाल हुई गाड़ियों को छुड़ाने के लिए अदालत का आदेश अहम होता है। चोरी की गाड़ी पुलिस को मिल जाए तो मालिक को कागज़ात पूरे करके उसे अदालत में पेश करना पड़ता है। अदालत के आदेश पर संबंधित पुलिस स्टेशन में जमा गाड़ियां छोड़नी पड़ती हैं। जब्त की गई गाड़ियों की नीलामी की प्रक्रिया कम से कम एक साल बाद की जाती है।