आज ग्रामीण महिला दिन: खेती से घर तक महिलाओं का योगदान, 15 अक्टूबर के इतिहास की घटनाएं
हर साल 15 अक्टूबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिन का मकसद गांव की महिलाओं के योगदान को पहचानना है। इस तारीख से जुड़ी इतिहास की कई घटनाएं भी दर्ज हैं।
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आज 15 अक्टूबर है और हर साल इसी दिन अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिन मनाया जाता है। इस दिन का मकसद गांव की महिलाओं के अहम योगदान को पहचानना और उनके सशक्तिकरण के लिए जागरूकता बढ़ाना है।
ग्रामीण महिलाएं खेती, अन्न उत्पादन, परिवार के पालन-पोषण और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाती हैं। यह दिन उन्हें उनके हक का एहसास कराता है और बराबर के मौके, संसाधन और फैसले लेने की प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए हौसला देता है।
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण से सिर्फ उनकी अपनी जिंदगी बेहतर नहीं होती, बल्कि पूरे समाज की तरक्की के लिए भी यह जरूरी माना जाता है। इस मौके पर उन पर केंद्रित कार्यक्रम और चर्चाएं होती हैं, जिनमें महिलाओं के योगदान को मान्यता दी जाती है और उनकी समस्याएं सुलझाने के उपाय सुझाए जाते हैं।
अब इतिहास की बात। 1846 में अमेरिकी डॉक्टर डॉ. जॉन वॉरेन ने सर्जरी के दौरान बेहोश करने के लिए पहली बार ईथर का इस्तेमाल किया। 1878 में एडिसन इलेक्ट्रिक लाइट कंपनी ने काम शुरू किया। 1888 में गोपाल गणेश आगरकर ने सुधारक अखबार शुरू किया। 1917 में पहले विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के लिए जासूसी करने के आरोप में डच नर्तकी माता हरी को पेरिस के पास गोली मार दी गई।
1932 में टाटा एयरलाइंस ने पहली उड़ान भरी। जे.आर.डी. टाटा यह विमान कराची से मुंबई लाए और इसी के साथ नागरिक विमान सेवा शुरू हुई। कंपनी के राष्ट्रीयकरण के बाद एयर इंडिया वजूद में आई। 1956 में पहली आधुनिक कंप्यूटर भाषा फोरट्रान पहली बार कोडिंग समुदाय के साथ साझा की गई।
नोबेल से जुड़ी भी कई तारीखें इसी दिन की हैं। 1968 में हरगोविंद खुराणा को नोबेल पुरस्कार मिला। 1973 में हेनरी किसिंजर और ली डक को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। 1984 में आर्चबिशप डेसमंड टुटू को नोबेल शांति पुरस्कार मिला। 1993 में अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के नेता नेल्सन मंडेला और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति एफ. डब्ल्यू. डी. क्लर्क को शांति के नोबेल पुरस्कार की घोषणा हुई।
1975 में बांग्लादेश की 2 साल की बच्ची रहीमा बानो चेचक की आखिरी मरीज साबित हुई। 1997 में भारतीय लेखिका अरुंधति रॉय के उपन्यास द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स को बुकर पुरस्कार मिला। 1999 में भारत के गीत सेठी को ग्लोबल फ्रेड डेविस पुरस्कार दिया गया। 2001 में नासा का गैलीलियो अंतरिक्ष यान बृहस्पति के चंद्रमा Io से 180 किमी की दूरी तक पहुंचा। 2003 में चीन ने शेनझोउ 5 लॉन्च किया, जो उसका पहला क्रू स्पेस मिशन था।
इस तारीख को जन्मे लोगों में बादशाह अकबर (1542), इटालियन गणितज्ञ और बैरोमीटर के आविष्कारक इवानजेलिस्टा टॉरिसेली (1608), जापान के पहले प्रधानमंत्री इटो हिरोबुमी (1841), अंग्रेजी लेखक पी. जी. वुडहाउस (1881), स्वतंत्रता सेनानी और लोकसभा के अस्थायी अध्यक्ष सेठ गोविंद दास (1896) और अर्थशास्त्री जे. के. गालब्रेथ (1908) शामिल हैं। लेखक मारियो पुजो (1920), कवि नारायण गंगाराम सुर्वे (1926) और भारत के 11वें राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (1931) का जन्म भी आज ही के दिन हुआ।
बांसुरीवादक एन. रामानी (1934), अभिनेता और निर्देशक विक्टर बनर्जी (1946), राजनेता छगन भुजबल (1947), पत्रकार और एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय रॉय (1949), हॉकी खिलाड़ी कुलबीर भौरा (1955), फिल्म निर्देशक मीरा नायर (1957) और मेवाती घराने के शास्त्रीय गायक पं. संजीव अभ्यंकर (1969) भी इसी तारीख को पैदा हुए।
मृत्यु की तारीखों में 1789 में उत्तर पेशवाई के मशहूर न्यायाधीश रामचंद्र विश्वनाथ प्रभुणे, 1793 में फ्रांस के राजा लुई सोलहवें की विधवा मेरी अंतोनेत, 1917 में माता हरी और 1930 में डाउ केमिकल कंपनी के संस्थापक हर्बर्ट डाउ का निधन दर्ज है। 1944 में ओगले कांच कारखाने के एक संस्थापक गुरुनाथ प्रभाकर ओगले, 1946 में जर्मन नाजी हर्मन गोरिंग और 1961 में हिंदी साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी निराला नहीं रहे। 1981 में इजराइली सेना प्रमुख और विदेश व रक्षा मंत्री रहे मोशे दायान, 1997 में मराठी फिल्मों के कैमरामैन दत्ता गोर्ले, 2002 में ऐतिहासिक उपन्यासकार ना. सं. इनामदार और लेखक व पटकथाकार वसंत सबनीस का निधन हुआ। 2012 में कंबोडिया के पहले प्रधानमंत्री नॉरदॉम सिहानोक भी इसी दिन दुनिया से गए।