आईआईटी की डिग्री के बिना गूगल पहुंचीं समृद्धि शर्मा, IIIT जबलपुर से तय किया सफर
गूगल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर समृद्धि शर्मा ने IIIT जबलपुर से पढ़ाई की और इंटर्नशिप के रास्ते कंपनी में फुल-टाइम नौकरी तक पहुंचीं।
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कोडिंग और टेक की दुनिया में करियर बनाने वाला हर नौजवान कभी न कभी गूगल में नौकरी का सपना देखता है। बहुत से लोगों को लगता है कि वहां पहुंचने के लिए आईआईटी या आईआईएम जैसे बड़े संस्थान की डिग्री जरूरी है। गूगल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर समृद्धि शर्मा की कहानी इस सोच को चुनौती देती है।
समृद्धि शर्मा ने IIIT जबलपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। बिना किसी बड़े प्लान के, सिर्फ अपनी मेहनत, सही वक्त पर लिए गए फैसलों और लगातार सीखते रहने की जिद के दम पर वे दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक गूगल तक पहुंचीं।
कॉलेज के शुरुआती दिनों से ही उनका झुकाव तकनीकी समस्याएं सुलझाने और नई चीजें सीखने की तरफ था। 2024 में उन्होंने गूगल के STEP (Student Training in Engineering Program) के जरिए अपनी पहली इंटर्नशिप हासिल की। 2025 में उन्होंने गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की दूसरी इंटर्नशिप पूरी की। इस दौरान वे ऑटोमेटेड डेटा पाइपलाइन्स और रियल-टाइम डैशबोर्ड्स जैसे मुश्किल प्रोजेक्ट्स पर काम करती रहीं। इन अनुभवों से उनका तकनीकी ज्ञान तो पक्का हुआ ही, कॉर्पोरेट दुनिया की बारीकियों से भी उनकी पहचान हुई। कुछ समय फिनटेक सेक्टर में काम करने के बाद वे फुल-टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर गूगल परिवार का हिस्सा बन गईं।
कॉलेज में समृद्धि IIIT जबलपुर के प्रोग्रामिंग क्लब BitByte की कोर टीम का अहम हिस्सा थीं। उन्होंने कई कोडिंग कॉम्पिटिशन आयोजित किए, जूनियर स्टूडेंट्स के लिए वर्कशॉप्स लीड कीं और कैंपस में एक मजबूत डेवलपर कम्युनिटी खड़ी करने में बड़ा योगदान दिया। लीडर और टीम मेंबर, दोनों भूमिकाओं में काम करने के इस हुनर ने उन्हें आगे की बड़ी चुनौतियों के लिए तैयार किया। उनका मानना है कि दूसरों को सिखाने और टीम के साथ आगे बढ़ने से समझ और गहरी होती है।
हैकथॉन और फेलोशिप में भी उन्हें पहचान मिली। उन्होंने मशहूर हैकथॉन HackCBS 7.0 जीता, जिसमें उन्होंने एक स्केलेबल पीयर-टू-पीयर रिसोर्स-शेयरिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया था। वे गूगल गर्ल हैकथॉन की फाइनलिस्ट रहीं और Google Women Techmakers Engineering Fellowship (WTEF) की स्कॉलर भी बनीं। जावा, पायथन, सी, रिएक्ट और MIRN स्टैक जैसी आधुनिक तकनीकों पर उनकी पकड़ ने उन्हें भीड़ से अलग खड़ा किया।
अक्सर नौजवान इस तनाव में रहते हैं कि पांच-दस साल बाद वे खुद को कहां देखेंगे। समृद्धि का नजरिया इससे बिल्कुल अलग और व्यावहारिक है। उनका कहना है कि पूरे करियर का ब्लूप्रिंट पहले से बनाने की जरूरत नहीं है। वे कहती हैं कि एक बार में एक कदम आगे बढ़ाइए, जहां हैं वहां 100 फीसदी दीजिए और भरोसा रखिए कि आज के अनुभव ही कल की दिशा तय करेंगे। उनके मुताबिक नाकामी से डरने के बजाय हर अनुभव से सीखना ही एक कामयाब प्रोफेशनल की सबसे बड़ी खासियत है।