मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:26 IST

सेना में डॉक्टर बनने का रास्ता: NEET, AFMC पुणे में दाखिला और शुरुआती सैलरी

भारतीय सेना में डॉक्टर बनने के लिए पात्रता, दाखिले की प्रक्रिया, ट्रेनिंग, सैलरी और रिटायरमेंट के फायदे।

सेना में डॉक्टर बनने का रास्ता: NEET, AFMC पुणे में दाखिला और शुरुआती सैलरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

देश की सेवा का सपना बहुत से नौजवान देखते हैं। लेकिन जब सरहद पर तैनात जवानों की जान बचाने की जिम्मेदारी डॉक्टर के तौर पर मिलती है, तो इज्जत और गर्व कई गुना बढ़ जाता है। सीमा पर सैनिक दिन-रात देश की हिफाजत करते हैं और उनकी सेहत और शुरुआती इलाज की जिम्मेदारी आर्मी मेडिकल सर्विस (AFMS) के पास होती है।

सेना में डॉक्टर बनना कोई आम नौकरी नहीं है। यह एक जज्बा है, जिसमें डॉक्टर होने के साथ-साथ सैनिक होने का सम्मान भी मिलता है। अगर आप मेडिकल की पढ़ाई के साथ फौज की वर्दी पहनना चाहते हैं, तो यह रास्ता बहुत अच्छा है।

पात्रता की बात करें तो उम्मीदवार को 12वीं की परीक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और इंग्लिश विषयों के साथ कम से कम 60 प्रतिशत अंकों से पास करनी होती है। इसके अलावा NEET परीक्षा पास होना भी जरूरी है।

सेना में डॉक्टर बनने के लिए आर्मी मेडिकल कॉलेज, पुणे (AFMC) प्रमुख केंद्र है। यहां दाखिला NEET के स्कोर के आधार पर मिलता है। शॉर्टलिस्ट हुए विद्यार्थियों को कॉम्प्युटर बेस्ड टेस्ट, इंटरव्यू और मेडिकल फिटनेस टेस्ट से गुजरना पड़ता है।

AFMC या दूसरे मिलिट्री हॉस्पिटल से जुड़े कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद MBBS की पढ़ाई के साथ सेना के नियम और अनुशासन के पाठ भी पढ़ाए जाते हैं। पढ़ाई पूरी होने पर विद्यार्थियों को भारतीय थल सेना, नौसेना या वायुसेना में सीधे लेफ्टिनेंट या कैप्टन के पद पर कमीशन दिया जाता है।

पात्र उम्मीदवारों की तैनाती देश भर के मिलिट्री हॉस्पिटल, फील्ड यूनिट, कमांड हॉस्पिटल या युद्धभूमि के मेडिकल पोस्ट पर की जाती है। कैप्टन के पद से शुरुआत होने पर 7वें वेतन आयोग के हिसाब से बेसिक सैलरी, मिलिट्री सर्विस पे और दूसरे भत्ते मिलाकर शुरुआती मासिक कमाई 1 लाख रुपये से काफी ज्यादा होती है।

इसके साथ ही दूसरे फौजी अफसरों की तरह उन्हें मुफ्त रहने की सुविधा, राशन, मेडिकल क्लेम, कैंटीन कार्ड, बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूल और प्रमोशन का मौका मिलता है।

रिटायरमेंट की उम्र सेना के डॉक्टर की रैंक और स्पेशलाइजेशन के हिसाब से आम तौर पर 58 से 60 साल या उससे ज्यादा हो सकती है। रिटायर होने के बाद केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक पेंशन, जिंदगी भर मुफ्त मेडिकल सुविधा और पूर्व सैनिकों के सारे फायदे मिलते हैं। समाज में मिलने वाला सबसे बड़ा सम्मान भी इस पेशे को सबसे खास बनाता है।

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