9 नवंबर को साल की आखिरी सोमवती अमावस्या, जानिए शिव पूजा की विधि और कथा
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साल 2026 की आखिरी सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को है। इस दिन शिव और माता पार्वती की पूजा, पीपल की परिक्रमा और पितरों के तर्पण की परंपरा बताई गई है।
साल 2026 की आखिरी सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को पड़ रही है। हिंदू धर्म में इस दिन को बहुत पवित्र और खास माना जाता है।
हिंदू पंचांग के मुताबिक जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन आती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार भगवान शंकर का वार है और अमावस्या को पितरों की तिथि माना जाता है। इसी वजह से इस दिन शिव, माता पार्वती और पितरों की पूजा का दुर्लभ और शुभ योग बनता है। यह अमावस्या साल में सिर्फ एक या दो बार आती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
सोमवती अमावस्या से जुड़ी एक मशहूर कथा सोना धोबिन की है। एक गरीब ब्राह्मण की बेटी की शादी नहीं हो पा रही थी। एक साधु ने लड़की से कहा कि अगर वह पास के गांव की सोना नाम की धोबिन का आशीर्वाद ले ले, तो उसकी शादी का योग बन जाएगा।
लड़की सोना धोबिन के घर गई और बिना अपनी कोई पहचान बताए निस्वार्थ भाव से उसकी सेवा करने लगी। जब सोना धोबिन को यह बात पता चली, तो उसने खुश होकर लड़की को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया।
संयोग से उसी दिन सोमवती अमावस्या थी। सोना धोबिन ने अपने पुण्य का कुछ हिस्सा लड़की को दे दिया, जिससे धोबिन के पति के प्राण बच गए और ब्राह्मण की बेटी की शादी भी धूमधाम से हुई। तब से शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं।
मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर शिव की पूजा करने से कुंडली के चंद्र दोष दूर होते हैं और सुख-समृद्धि मिलती है। पूजा का तरीका यह बताया गया है कि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हो सके तो पानी में थोड़ा गंगाजल डाल लें। इसके बाद शिव मंदिर में या घर के शिवलिंग पर कच्चा दूध, दही, शहद और गंगाजल चढ़ाएं और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।
शिव को बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, अक्षत यानी साबुत चावल और चंदन का टीका चढ़ाया जाता है। इस दिन सिर्फ शिव की नहीं, माता पार्वती की भी साथ में पूजा करने को कहा गया है। शादीशुदा महिलाएं माता पार्वती को हल्दी-कुमकुम और सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। पूजा के आखिर में शिव चालीसा का पाठ करें और धूप-दीप जलाकर महादेव की आरती करें।
इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा, यानी अश्वत्थ पूजा, भी की जाती है। माना जाता है कि सोमवती अमावस्या पर पीपल में त्रिदेव, यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। पेड़ को दूध और पानी चढ़ाकर कच्चे सूती धागे से 108 बार परिक्रमा करने की परंपरा है।
यह दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए भी अच्छा माना जाता है। पितरों के नाम से तर्पण करें और जरूरतमंद लोगों को अन्न, कपड़े या तिल दान करें।


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