शनिवार, 17 अक्टूबर 2026

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09:13 IST

8 अक्टूबर को ऑक्टोपस दिवस: तीन दिल, नीला खून और गजब का दिमाग

हर साल 8 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व ऑक्टोपस दिवस पर समुद्र के इस अनोखे जीव की बनावट, दिमाग और उस पर मंडराते खतरों की कहानी।

8 अक्टूबर को ऑक्टोपस दिवस: तीन दिल, नीला खून और गजब का दिमाग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

समंदर की गहराई हमेशा से इंसान को अपनी तरफ खींचती रही है। इसके तल में हजारों अनोखे जीव रहते हैं, लेकिन अपनी अलग बनावट और तेज दिमाग से दुनिया को सबसे ज्यादा हैरान करने वाला जीव ऑक्टोपस है। हर साल 8 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व ऑक्टोपस दिवस (World Octopus Day) मनाया जाता है।

इस दिन का मकसद समुद्री जीवन को बचाना है। साथ ही लोगों को ऑक्टोपस की अजीब दुनिया के बारे में बताना और यह समझाना भी मकसद है कि समंदर के इकोसिस्टम में इनका क्या योगदान है। तारीख चुनने के पीछे एक दिलचस्प वजह है। अंग्रेजी का शब्द October लैटिन भाषा के Octo से आया है, जिसका मतलब है आठ, और ऑक्टोपस के भी आठ हाथ होते हैं।

ऑक्टोपस सिर्फ आठ हाथों वाला जीव नहीं है, वह कुदरत का एक करिश्मा है। विज्ञान की नजर से वह मोलस्क (Mollusks) यानी नरम शरीर वाले जीवों में आता है। फिर भी उसकी समझदारी की वजह से उसे समंदर का विचारक कहा जाता है। वह पहेली सुलझा सकता है, कांच की बोतल का ढक्कन अंदर और बाहर दोनों तरफ से खोल सकता है और इंसानी चेहरे याद रख सकता है। रीढ़ की हड्डी न रखने वाले बाकी सभी जीवों (Invertebrate) के मुकाबले उसके दिमाग की बनावट कहीं ज्यादा विकसित होती है। उसकी कुल न्यूरॉन (Neurons) कोशिकाओं में से करीब दो तिहाई उसके आठ हाथों में फैली होती हैं, इसलिए उसके हाथ अपने दम पर अलग-अलग फैसले ले सकते हैं।

रंग बदलने की कला ऑक्टोपस की सबसे दिलचस्प ताकत है। इसे कैमोफ्लाज (Camouflage) कहते हैं, यानी अपना रंग और त्वचा की बनावट बदल लेना। दुश्मन से बचना हो या शिकार करना हो, वह सेकंड के कुछ हिस्सों में आसपास की चट्टान, रेत या काई जैसा रंग और आकार ले लेता है।

उसके शरीर में तीन दिल होते हैं। इनमें से दो दिल गिल्स (Gills) के जरिए खून को साफ करते हैं, जबकि तीसरा दिल पूरे शरीर में खून पहुंचाता है। खास बात यह है कि उसका खून लाल नहीं, नीला होता है। उसके खून में लोहे की जगह तांबा (Copper) भरपूर मात्रा में रखने वाला हीमोसायनिन (Hemocyanin) नाम का प्रोटीन होता है। यह प्रोटीन उसे ठंडे और कम ऑक्सीजन वाले समंदर के तल में रहने में मदद करता है।

समुद्री फूड चेन (Marine Food Chain) को संतुलित रखने में ऑक्टोपस की बड़ी भूमिका है। वह केकड़े, झींगे, सीप-शंख और छोटी मछलियों का शिकार करके उनकी तादाद काबू में रखता है, और खुद व्हेल, सील और बड़ी मछलियों का खाना बनता है। अगर समंदर में ऑक्टोपस कम हो गए तो पूरे समुद्री इकोसिस्टम का संतुलन बिगड़ सकता है।

आज इंसानी गतिविधियों की वजह से इस अनोखे जीव का वजूद खतरे में है। समंदर में बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण, जहरीले केमिकल, जहाजों के हादसे, जलवायु परिवर्तन से बढ़ता समुद्र का तापमान और कारोबार के लिए होने वाली जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ाई (Overfishing) की वजह से ऑक्टोपस के कुदरती ठिकानों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

ऑक्टोपस दिवस सिर्फ एक जीव के बारे में उत्सुकता जताने का दिन नहीं है। यह कुदरत और इंसान के बीच बिगड़ते संतुलन को फिर से ठीक करने की याद दिलाता है। इस दिन दुनिया भर के समुद्री जीव वैज्ञानिक, पर्यावरण प्रेमी, एक्वेरियम और पर्यावरण संस्थाएं कई कार्यक्रमों, वर्कशॉप और ऑनलाइन मुहिमों के जरिए लोगों से प्लास्टिक कम इस्तेमाल करने, समंदर को साफ रखने और समुद्री जीवों को बचाने की अपील करती हैं। कुदरत के बनाए हर जीव को इस धरती पर जीने का बराबर हक है, और समंदर के इस शांत रखवाले को बचाना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है।

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