सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर दिखाई अपनी आत्मकथा "Belonging: A Journey of Love" की पहली झलक
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 22 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर अपनी आने वाली आत्मकथा की झलक वाला वीडियो शेयर किया।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
राष्ट्रीय कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज, 22 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपनी पहली आत्मकथा का वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में उन्होंने अपनी आने वाली किताब "बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव" (Belonging: A Journey of Love) की एक झलक दिखाई है। अपनी पहली इंस्टाग्राम पोस्ट में किताब की पहली झलक साझा करते हुए सोनिया गांधी ने आभार जताया।
पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने अपने चाहने वालों से सीधी बात की है। सोनिया गांधी की यह पहली पोस्ट गुरुवार सुबह 9 बजे की गई। उसमें लिखा है, "नमस्कार, मेरी किताब आप सभी के साथ शेयर करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। यह प्यार, फर्ज, अपनों को खोने और अपनेपन की जगह तलाशने की कहानी है। मैं यह किताब आप सभी के साथ शेयर करने के लिए उत्सुक हूं।"
वीडियो में सोनिया अपनी करीबी सहेलियों और बेटी प्रियंका गांधी के साथ दिखाई दे रही हैं। वीडियो के दौरान प्रियंका गांधी अपनी मां सोनिया गांधी को मिठाई खिलाती भी नजर आती हैं।
किताब में सोनिया गांधी के इटली के बचपन से लेकर केंब्रिज में राजीव गांधी से हुई मुलाकात तक के सफर का ब्योरा है। नेहरू-गांधी परिवार में शादी के बाद और परिवार में हुई हत्याओं के बाद उनकी जिंदगी में आए बदलाव का जिक्र भी इसमें किया गया है।
"बिलॉन्गिंग" की शुरुआत जंग के बाद के इटली के व्हेनेटो इलाके में सोनिया गांधी के बचपन से होती है। इसके बाद किताब में केंब्रिज में उनके रहने का और 1965 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पोते राजीव गांधी से हुई मुलाकात का जिक्र है।
आत्मकथा में राजीव गांधी के साथ उनकी शादी और सास, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से हुई पहली मुलाकात का किस्सा भी दिया गया है। हिंदी सीखने और साड़ी पहनने से लेकर भारतीय खान-पान अपनाने तक, भारत की जिंदगी में ढलने के उनके तजुर्बे भी इसमें शामिल हैं।
किताब में गांधी परिवार को बदल देने वाले बड़े हादसों का ब्योरा भी है। इनमें संजय गांधी की विमान हादसे में मौत, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या शामिल हैं।
आत्मकथा में 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद की सियासी हलचल का भी जिक्र है, जिसमें कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन को जीत मिली थी। इसके बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री का पद ठुकरा दिया और पार्टी व गठबंधन की अगुवाई की। कांग्रेस की अगुवाई वाला गठबंधन अगले 10 साल सत्ता में रहा।
1991 में पति राजीव गांधी की हत्या के बाद भी सोनिया गांधी ने सियासत से दूर रहना ही ठीक समझा था। पी. व्ही. नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने। 1996 तक कांग्रेस कमजोर पड़ने लगी और पार्टी में कई गुट बन गए। तब 1997 में कांग्रेस को फिर एकजुट करने के लिए सोनिया गांधी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली। 62 दिन बाद, 1998 में वे कांग्रेस अध्यक्ष बन गईं। सोनिया गांधी 2017 तक अध्यक्ष रहीं, जो पार्टी के इतिहास का सबसे लंबा कार्यकाल था।
2004 में कांग्रेस ने 14 सहयोगी दलों के साथ यूपीए बनाया। चुनाव के बाद वामपंथी दलों समेत कई पार्टियों के समर्थन से यूपीए को 335 सांसदों का समर्थन मिला। सहयोगी दलों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को यह पद ठुकरा दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।
सोनिया गांधी के विदेशी नागरिक होने का मुद्दा उठाकर एनडीए ने उनके प्रधानमंत्री बनने का विरोध किया था। इसके चलते सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद नकार दिया और मनमोहन सिंह का नाम प्रधानमंत्री के तौर पर आगे रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। हालांकि कहा जाता है कि सोनिया गांधी पर्दे के पीछे रहकर सरकार पर नियंत्रण रखती थीं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।