10 अक्टूबर को वर्ल्ड गुलाबजामुन डे: मिठाई का इतिहास, नाम की कहानी और नए रूप
हर साल 10 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व गुलाबजामुन दिवस पर इस मिठाई के सफर, नाम और किस्मों की जानकारी।
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त्योहार हो, शादी-ब्याह का मौसम हो या घर में कोई छोटी-सी खुशखबरी आई हो, मुंह मीठा करने की बात आती है तो सबसे पहले जो मिठाई याद आती है, वह है गुलाबजामुन। जीभ पर रखते ही घुल जाने वाली यह मिठाई बच्चों से लेकर बड़ों तक सबकी पसंद है और सिर्फ महाराष्ट्र में नहीं, पूरे भारत में बड़े चाव से खाई जाती है।
इसी चहेती मिठाई का सम्मान करने और उसकी समृद्ध परंपरा को याद करने के लिए हर साल 10 अक्टूबर को 'वर्ल्ड गुलाबजामुन डे' मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक मिठाई का जश्न नहीं है। इसे भारतीय खानपान की संस्कृति, अपनेपन और मिठास की निशानी माना जाता है।
गुलाबजामुन बनाने का तरीका भारतीय रसोई की एक खूबसूरत परंपरा का हिस्सा है। शुद्ध दूध के खोये (मावा) को अच्छी तरह मसला जाता है और उससे छोटे-छोटे गोले बनाए जाते हैं। इन्हें धीमी आंच पर घी या तेल में सुनहरे-भूरे रंग तक तला जाता है। इसके बाद इलायची, केसर और गुलाब की पंखुड़ियों की खुशबू वाली गुनगुनी चाशनी में डुबोया जाता है। जब चाशनी जामुन के अंदर तक पहुंच जाती है, तो उसका रसीला और मुलायम स्वाद शब्दों में बयान करना मुश्किल है। गरमागरम गुलाबजामुन हो या ठंडी आइसक्रीम के साथ, खाने के शौकीनों के लिए यह किसी दावत से कम नहीं।
इतिहास को लेकर इतिहासकारों की अलग-अलग राय हैं। कई खान-पान इतिहासकारों के मुताबिक मध्य युग में मध्य एशिया या फारस (ईरान) से 'लुकमत अल-कादी' (Luqmat al-Qadi) नाम की एक मिठाई भारत आई थी। मुगल दौर में भारतीय रसोइयों ने यहां के खोये और शक्कर से इसे एक नया भारतीय रूप दे दिया।
नाम की जड़ें भी फारसी शब्दों में बताई जाती हैं। 'गुलाब' शब्द 'गुल' (फूल) और 'आब' (पानी या अर्क) से बना है, जिसका मतलब है गुलाब की खुशबू वाला पानी। 'जामुन' नाम इसके गोल आकार और तलने के बाद आने वाले जामुन जैसे गहरे रंग से पड़ा। इस तरह गुलाब की महक वाली और जामुन जैसी दिखने वाली इस मिठाई को गुलाबजामुन नाम मिला।
वक्त के साथ भारतीय रसोइयों और घर की महिलाओं ने गुलाबजामुन बनाने में कई नए प्रयोग किए हैं। आज बाजार और घरों में सिर्फ पारंपरिक मावा गुलाबजामुन ही नहीं, कई किस्में मिलती हैं। ड्राय या सूखे गुलाबजामुन को चाशनी से निकालकर उस पर सूखे नारियल या शक्कर की परत चढ़ाई जाती है, जो सफर में साथ ले जाने के लिए अच्छा रहता है। काला जामुन को धीमी आंच पर ज्यादा देर तलकर गहरा काला रंग दिया जाता है, इसकी बाहरी परत थोड़ी कड़ी और अंदर का हिस्सा बहुत मुलायम होता है। पनीर और छेना जामुन खोये की जगह ताजा पनीर या छेने से बनते हैं और बेहद हल्के व मुलायम होते हैं। केसर और स्टफ्ड जामुन के अंदर काजू, बादाम, पिस्ता और केसर की भरावन डालकर उसे और शाही रूप दिया जाता है।
आज भारतीय रेस्टोरेंट के जरिए गुलाबजामुन ने दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना ली है। विदेशी सैलानी और खाने के शौकीन भारत आते हैं, तो गुलाबजामुन का स्वाद चखे बिना उनका सफर पूरा नहीं होता। विश्व गुलाबजामुन दिवस पर कई लोग घर में खुद गुलाबजामुन बनाते हैं, तो कुछ अपने दोस्तों, परिवार और साथ काम करने वालों को मिठाई बांटकर खुशी मनाते हैं। यह दिन याद दिलाता है कि खाना सिर्फ भूख मिटाने के लिए नहीं होता, वह लोगों को साथ लाने और रिश्तों में मिठास घोलने का भी बढ़िया जरिया है।