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03:36 IST

1 सितंबर को जागतिक पत्रलेखन दिन: हाथ से लिखी चिट्ठियों की परंपरा याद दिलाने का दिन

डिजिटल दौर में चिट्ठियों का अपनापन बनाए रखने के लिए हर साल 1 सितंबर को जागतिक पत्रलेखन दिन मनाया जाता है।

1 सितंबर को जागतिक पत्रलेखन दिन: हाथ से लिखी चिट्ठियों की परंपरा याद दिलाने का दिन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में डिजिटल तकनीक ने इंसान की ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी है। व्हॉट्सऐप, ईमेल, इंस्टाग्राम और टेक्स्ट मैसेज के एक क्लिक पर चंद सेकंड में दुनिया में कहीं भी संदेश पहुंच जाता है। लेकिन इस डिजिटल भागदौड़ में कभी बातचीत का मुख्य सहारा रही पत्र लिखने की खूबसूरत परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है।

इसी लिखित बातचीत की याद दिलाने, चिट्ठियों का अपनापन बनाए रखने और लोगों को फिर से कलम और कागज़ हाथ में लेने के लिए प्रेरित करने के मकसद से हर साल 1 सितंबर को पूरी दुनिया में 'जागतिक पत्रलेखन दिन' (World Letter Writing Day) बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

इस दिन को मनाने की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के लेखक, फोटोग्राफर और कलाकार रिचर्ड सिम्पकिन (Richard Simpkin) ने 2014 में की। 1990 के दशक में उन्होंने अपने एक किताब के प्रोजेक्ट के लिए कई मशहूर लोगों को हाथ से लिखी चिट्ठियां भेजी थीं। जब उन दिग्गजों की तरफ से उन्हें अपने हाथ से लिखे जवाब मिले, तो उन्हें जो खुशी और अपनापन महसूस हुआ, वह कभी भूलने लायक नहीं था। इसी अनुभव से उन्होंने तय किया कि डिजिटल बातचीत के दौर में हाथ से लिखी चिट्ठियों का अपनापन बचाए रखने के लिए एक खास दिन तय किया जाए।

आज ईमेल या मैसेज टाइप करके भेजना जितना आसान है, उसमें भावनाओं की नमी उतनी ही कम पड़ जाती है। इसके उलट, अपने हाथ से लिखे खत में एक अलग निजी छुअन होती है। चिट्ठी का हर अक्षर, स्याही की खुशबू और लिखने वाले की हस्तकला उस संदेश को खास और कीमती बना देती है। चिट्ठियां सिर्फ शब्दों का औपचारिक लेन-देन नहीं होतीं, वे दो दिलों को जोड़ने वाला भावनाओं का पुल और यादों का कभी न खत्म होने वाला खज़ाना होती हैं। पुरानी चिट्ठियां बरसों तक संभालकर रखी जा सकती हैं, और जब भी उन्हें पढ़ा जाता है, पुरानी यादें फिर ताज़ा हो जाती हैं।

जागतिक पत्रलेखन दिन के मौके पर दुनियाभर के स्कूल, कॉलेज और शिक्षा संस्थानों में खास कार्यक्रम होते हैं। आज की डिजिटल पीढ़ी को सिखाया जाता है कि चिट्ठी कैसे लिखी जाए, लिफाफे पर पता कैसे लिखा जाए और डाक की प्रक्रिया क्या होती है। विद्यार्थियों को अपने दोस्तों, माता-पिता या शिक्षकों को हाथ से चिट्ठी लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इससे बच्चों की भाषा समृद्ध होती है, वाक्य बनाने का तरीका सुधरता है, अपनी बात रखने की क्षमता बढ़ती है और उनकी रचनात्मकता व कल्पना को बड़ा मौका मिलता है।

चिट्ठी में अपने विचार रखते समय इंसान को सोचने का वक्त मिलता है। जल्दबाज़ी में मैसेज भेजने की जगह आराम से बैठकर मन की बात कागज़ पर उतारना मानसिक तनाव कम करने वाला (Therapeutic) अनुभव होता है। अपने किसी प्रिय, दोस्त या करीबी रिश्तेदार को हाथ से लिखी चिट्ठी भेजने पर रिश्ते में मिठास और भरोसा और बढ़ता है।

कुल मिलाकर, तकनीक का इस्तेमाल ज़रूरी है, लेकिन इंसानी भावनाओं और अपनापन संजोने वाली पत्र लिखने की कला को हरगिज़ खत्म नहीं होने देना चाहिए। इसलिए इस जागतिक पत्रलेखन दिन पर थोड़ी देर स्क्रीन से दूर होकर अपने किसी करीबी के लिए एक खूबसूरत हाथ से लिखी चिट्ठी ज़रूर लिखिए और बातचीत की इस मिठास को एक बार फिर महसूस कीजिए।

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