मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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सास की हत्या की आरोपी अनुपमा शिंदे को पुणे की अदालत से जमानत, मानसिक इलाज का हवाला

सास की हत्या की आरोपी अनुपमा शिंदे को पुणे की अदालत से जमानत, मानसिक इलाज का हवाला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

पुणे सेशंस कोर्ट ने सास की मौत के मामले में आरोपी अनुपमा शिंदे को जमानत दी। स्किज़ोफ्रेनिया की रिपोर्ट और पति-बेटे के भरोसे को अदालत ने अहम माना।

पुणे की सेशंस कोर्ट ने सास की मौत के मामले में आरोपी अनुपमा शिंदे को जमानत दे दी है। अदालत ने इस फैसले में दो बातों को वजन दिया। एक, उन्हें स्किज़ोफ्रेनिया होने की रिपोर्ट। दो, परिवार का यह भरोसा कि उनका इलाज जारी रखा जाएगा।

यह आदेश 29 अक्टूबर को अडिशनल सेशंस जज ए. के. शर्मा ने दिया। इसके मुताबिक शिंदे अब घर लौट सकती हैं और मनोचिकित्सक का इलाज भी चलता रहेगा। उनके पति और बेटे ने लिखकर दिया है कि रिहाई के बाद इलाज की जिम्मेदारी वे संभालेंगे।

शिंदे 12 मई से हिरासत में थीं। यही वह दिन था, जब उनकी सास की मौत हुई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि घटना से पहले घर में किसी बात पर विवाद हुआ था। शिकायत के मुताबिक आरोपी ने बुजुर्ग महिला को कमरे में बंद करके बाहर से कुंडी लगा दी और फिर चाकू से हमला किया। महिला के हाथों और गले पर जख्म आए और बाद में उनकी मौत हो गई।

बताया गया है कि कथित तौर पर यह वारदात दोपहर डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच हुई। भारती विद्यापीठ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 127(2) के तहत केस दर्ज किया। ये धाराएं हत्या और गलत तरीके से बंधक बनाने से जुड़ी हैं। साथ में महाराष्ट्र पुलिस एक्ट के प्रावधान भी लगाए गए हैं।

जमानत की अर्जी में बचाव पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट को सबसे बड़ा आधार बनाया। 7 सितंबर को बी. जे. गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और ससून जनरल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर के जरिए उनकी जांच हुई थी। उसमें दर्ज किया गया कि शिंदे को स्किज़ोफ्रेनिया है, उन्हें कई बार इसके दौरे पड़ चुके हैं और जांच के वक्त भी लक्षण बने हुए थे।

उनके वकील ने दलील दी कि हिरासत में रखने या न रखने का फैसला करते वक्त उनकी मानसिक सेहत को भी देखा जाना चाहिए। बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि उन्हें नियमित मनोचिकित्सकीय देखभाल चाहिए, जो जेल के बाहर परिवार करा सकता है।

अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध किया। उसका कहना था कि आरोप बेहद गंभीर हैं और सिर्फ इसी वजह से जमानत नहीं मिलनी चाहिए।

जज ने अर्जी पर फैसला देने से पहले जांच के कागजात, पुलिस का जवाब और मेडिकल रिपोर्ट देखी। अदालत ने दर्ज की गई मानसिक बीमारी और पति व बेटे की ओर से इलाज की जिम्मेदारी लेने के वादे, दोनों को ध्यान में रखा।

रिहाई के लिए शिंदे को 50,000 रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही रकम का स्थानीय जमानतदार देना होगा।

अदालत ने साफ किया कि जमानत के इस आदेश में हत्या के आरोपों के सही या गलत होने पर कोई फैसला नहीं हुआ है। वे आरोप अब भी कानूनी कार्यवाही के दायरे में हैं।

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