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पुणे कोर्ट ने कैप्सूल में ब्लेड के टुकड़े खिलाने के मामले में पति को 7 साल की सख्त कैद सुनाई

पुणे कोर्ट ने कैप्सूल में ब्लेड के टुकड़े खिलाने के मामले में पति को 7 साल की सख्त कैद सुनाई तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

उत्तमनगर पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। पत्नी और बेटे के बयान बदलने के बाद भी कोर्ट ने मेडिकल सबूतों पर फैसला दिया।

पुणे की एक अदालत ने पत्नी को कैल्शियम की गोली बताकर कैप्सूल में ब्लेड के टुकड़े खिलाने के मामले में आरोपी पति को 7 साल की सख्त कैद और 70,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला पति-पत्नी के रिश्ते को शर्मसार करने वाला है।

सजा पाने वाले आरोपी का नाम सोमनाथ साधू सपकाळ है। उसकी उम्र 45 साल है और वह पुणे के उत्तमनगर इलाके में शिवणे में रहता था। आरोप था कि वह पत्नी के चरित्र पर शक करता था और इसी वजह से उसे मानसिक और शारीरिक तौर पर परेशान करता था।

अक्टूबर 2023 में महिला के पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हुआ। शुरू में किसी को इस तकलीफ की सही वजह समझ नहीं आई। कुछ दिन बाद शौच के रास्ते ब्लेड के टुकड़े निकले, तब जाकर पूरा मामला सामने आया। इससे इलाके में हड़कंप मच गया।

दर्द बढ़ने पर महिला को 11 नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने सोनोग्राफी समेत जरूरी मेडिकल जांचें कीं, तो पता चला कि उसके पेट में ब्लेड का एक टुकड़ा फंसा हुआ है। महिला की जान को गंभीर खतरा था, इसलिए डॉक्टरों ने फौरन ऑपरेशन करके वह टुकड़ा बाहर निकाला।

पति पर आरोप लगा कि उसने कैल्शियम की गोली कहकर कैप्सूल में भरे ब्लेड के टुकड़े पत्नी को खिलाए। इस मामले में उत्तमनगर पुलिस ने सोमनाथ सपकाळ के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था।

सुनवाई के दौरान मामले में बड़ा मोड़ आया। महिला और उसके बेटे ने कोर्ट में अपना बयान बदल दिया। बताया गया है कि दोनों ने यह कहते हुए आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया कि पति-पत्नी का झगड़ा सुलझ चुका है।

इसके बावजूद सरकारी पक्ष ने मेडिकल सबूतों और डॉक्टरों की गवाही पर जोर दिया। सरकारी वकील ऍड. पाठक ने 7 गवाहों की जांच कराई। डॉक्टरों ने गवाही में कहा कि ब्लेड का टुकड़ा food pipe या आंत को चोट पहुंचाकर अंदरूनी ब्लीडिंग कर सकता था और इससे महिला की जान जा सकती थी।

कोर्ट ने मेडिकल और वैज्ञानिक सबूतों को देखते हुए महिला के बदले हुए बयान को निर्णायक नहीं माना। इसलिए आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए मौजूद सबूतों को ज्यादा अहमियत दी गई।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी घर में अकेला कमाने वाला है और पत्नी व बेटा उसी पर निर्भर हैं। यह बात कोर्ट के सामने रखी गई। लेकिन मामले की गंभीरता, महिला की जान पर आए खतरे और मेडिकल सबूतों को देखकर पुणे कोर्ट के एडिशनल सेशन जज ने आरोपी को 7 साल की सख्त कैद सुनाई और 70,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

इस फैसले से एक बार फिर साफ हुआ कि गंभीर अपराधों में पीड़ित या गवाह बयान बदल दें, तब भी कोर्ट ठोस मेडिकल और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर फैसला दे सकती है।

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