लोहगढ़ हत्याकांड: आरोप तय करने की सुनवाई टली, अब 17 नवंबर को होगी अगली तारीख
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युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में डिजिटल सबूत को लेकर बचाव पक्ष की आपत्ति के बाद वडगांव मावल की अदालत ने आरोप तय करने का काम आगे बढ़ा दिया।
पुणे: लोहगढ़ किले पर युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोप तय करने का काम अब 17 नवंबर तक टल गया है। बचाव पक्ष के वकीलों ने डिजिटल सबूत और केस से जुड़े दस्तावेज़ मिलने पर सवाल उठाए, जिसके बाद अदालत ने यह फैसला लिया।
शनिवार को वडगांव मावल की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। 5,053 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह पहली सुनवाई थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डी के अंबुले के सामने तीनों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पेश किए गए। इनमें मुख्य आरोपी सिया गोयल, चेतन चौधरी और रितेश हांगे शामिल हैं।
सरकारी पक्ष की ओर से विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम अदालत में मौजूद थे। सिया गोयल की तरफ से वकील विपुल दुशिंग और एन एम भालेराव पेश हुए, जबकि चेतन चौधरी की पैरवी हर्षद निंबालकर और जयराज जगताप ने की। रितेश हांगे ने अब तक कोई वकील नहीं रखा है और उसने इसके लिए अदालत से वक्त मांगा। अदालत ने साफ किया कि अगर वह अगली सुनवाई तक वकील नहीं करता, तो उसे लीगल सर्विसेज़ कमेटी के ज़रिए वकील दिया जाएगा।
बचाव पक्ष का कहना था कि इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत उन्हें उपलब्ध नहीं हैं। वकीलों ने दलील दी कि सबूत से जुड़े डिजिटल दस्तावेज़ पुलिस ने मुहैया नहीं कराए, इसलिए आरोपियों के लिए आगे की कार्रवाई में दिक्कत आ रही है। उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 207 का हवाला दिया और कहा कि केस में जिन दस्तावेज़ों का सहारा लिया गया है, उनकी कॉपी पाने का हक आरोपियों को है। इसी आधार पर उन्होंने सामग्री दिलाने के निर्देश देने की मांग की।
सरकारी पक्ष की ओर से निकम ने इस दलील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संबंधित सबूत तय पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं और जिन पक्षों को ज़रूरत है, वे उसे देख सकते हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी के आपसी रिश्ते, हत्या से पहले की कथित तैयारियों, मोबाइल फोन से निकाले गए डिजिटल सबूत, इंटरनेट पर की गई सर्च और बातचीत के रिकॉर्ड की पड़ताल की। बताया गया है कि चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने पहले से लोहगढ़ इलाके का जायज़ा लिया था और हत्या के कथित तरीके का रिहर्सल भी किया था। पहले सिया गोयल और चेतन चौधरी की गिरफ्तारी हुई थी। उसके बाद चौधरी के दोस्त रितेश हांगे को गिरफ्तार किया गया।
सुनवाई के बाद पत्रकारों से बात करते हुए निकम ने कहा कि अगली तारीख पर आरोप तय करने की प्रक्रिया होगी। उन्होंने बताया कि सरकारी पक्ष दस्तावेज़ी सबूतों पर भरोसा करेगा और अपने पास मौजूद सबूतों की सूची अदालत के सामने रखेगा। निकम ने यह भी कहा कि आरोपियों के चेहरे पर न कोई दुख दिखा और न पछतावे के निशान नज़र आए।
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