मुंबई में निर्माण धूल पर सख्ती, बीएमसी आयुक्त भिड़े ने बिल्डरों को कार्रवाई की चेतावनी दी
नगर आयुक्त अश्विनी भिड़े ने मंगलवार को कहा कि निर्माण स्थलों पर धूल रोकने में नाकाम डेवलपर्स और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) उन डेवलपर्स और निर्माण ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई करेगी, जो निर्माण स्थलों और उनसे सटी सड़कों पर धूल प्रदूषण को काबू में नहीं रखते। नगर आयुक्त अश्विनी भिड़े ने मंगलवार को यह बात कही।
भिड़े ने यह निर्देश मुंबई की हवा की गुणवत्ता सुधारने के उपायों की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में बॉम्बे हाईकोर्ट के उन निर्देशों पर भी बात हुई, जो पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण और उसके सेहत पर असर को लेकर हैं।
आयुक्त ने कहा कि निर्माण स्थलों और आसपास की सड़कों पर धूल रोकने की जिम्मेदारी डेवलपर्स और ठेकेदारों की है। उन्हें निर्माण क्षेत्र साफ रखना होगा, धूल हवा में न फैले इसके लिए ठीक इंतजाम करने होंगे और निर्माण स्थल के तय नियमों का पालन करना होगा।
भिड़े ने साफ कहा कि बीएमसी के वायु प्रदूषण रोकने के 28 सूत्री दिशानिर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, उन्हें जमीन पर उतारना होगा। संबंधित विभागों को आपस में तालमेल बनाकर काम करने और प्रदूषण रोकने के उपायों की नियमित जांच करने को कहा गया है। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिले, वहां फौरन कार्रवाई करने के निर्देश भी अफसरों को दिए गए।
आयुक्त ने अफसरों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि मुंबई में हवा की गुणवत्ता मापने वाले स्टेशन, सेंसर और उनसे जुड़े उपकरण चालू रहें और सही रीडिंग दिखाएं। बीएमसी के मुताबिक अगर ये सिस्टम बंद मिले या गलत आंकड़े दिखा रहे हों, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने संबंधित विभागों को सड़कों की सफाई के लिए आधुनिक उपकरण इस्तेमाल करने और धूल पर काबू पाने के लिए खास सफाई अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। विभागों से कहा गया कि शहर की हवा में ठोस सुधार लाने के लिए मिलकर काम करें।
बैठक में पटाखों पर हाईकोर्ट के निर्देशों के अमल की भी समीक्षा हुई। बीएमसी के मुताबिक हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगाई है। स्कूल, अस्पताल, सरकारी दफ्तर और अदालतों के आसपास के साइलेंस जोन में भी पटाखे फोड़ना मना है। भिड़े ने अफसरों से वार्ड स्तर पर इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को कहा।
उन्होंने पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण और सेहत के खतरों को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की भी बात कही। अफसरों से कहा गया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर लोगों में जागरूकता फैलाएं और सरकारी व निजी स्कूलों के बच्चों के लिए कार्यक्रम आयोजित करें। आयुक्त ने नागरिकों से अपील की कि ज्यादा प्रदूषण करने वाले पटाखों की जगह ग्रीन पटाखे इस्तेमाल करें।
बैठक में अतिरिक्त नगर आयुक्त (पूर्वी उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे, उपायुक्त (नगर आयुक्त कार्यालय) प्रशांत गायकवाड़, उपायुक्त (पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन) अविनाश काटे, जोनल संयुक्त आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त और दूसरे अधिकारी मौजूद थे।
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