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मुंबई में सिग्नल खराबी और कांजुरमार्ग रिले हट की आग से सेंट्रल रेलवे की लोकल ठप

सोमवार को सेंट्रल रेलवे की मेनलाइन पर सिग्नल फेल होने और कांजुरमार्ग में रिले हट में आग लगने से हजारों यात्री घंटों फंसे रहे।

मुंबई में सिग्नल खराबी और कांजुरमार्ग रिले हट की आग से सेंट्रल रेलवे की लोकल ठप तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

सोमवार को मुंबई में सेंट्रल रेलवे (CR) की मेनलाइन पर कई जगह सिग्नल फेल हो गए। इसकी वजह से दफ्तर जाने वाले और स्कूल-कॉलेज के हजारों लोग घंटों फंसे रहे। शाम को लोकल सेवाएं धीरे-धीरे फिर शुरू हुईं, लेकिन सवाल यह है कि अगर कल यही हालत दोबारा बन गई तो मुंबई कितनी तैयार है।

गड़बड़ी करीब 9.30 बजे शुरू हुई। कांजुरमार्ग के पास सिग्नल रिले हट के अंदर आग लग गई और CTC (सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल) का रैक जल गया। इसी रैक में सिग्नल और टेलीकम्युनिकेशन (S&T) के जरूरी उपकरण लगे थे। नतीजा यह हुआ कि भांडुप और विक्रोली के बीच सारे छह ट्रैक पर सिग्नल बंद हो गए। इससे पहले ठाणे और मुलुंड के बीच भी खराबी की खबर थी, इसलिए अप और डाउन, स्लो और फास्ट, सभी लाइनें ठप हो गईं।

रेलवे मेंटेनेंस टीम के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यात्रियों को आगे भी देरी झेलनी पड़ सकती है। उनके मुताबिक आज सेवाएं चालू करने के लिए युद्धस्तर पर अस्थायी जुगाड़ किया गया, लेकिन खराब हुए सिग्नल उपकरण पूरी तरह बदलने में कम से कम 10 दिन और लगेंगे, क्योंकि ये उपकरण आज ही पहुंचे हैं।

शाम को लोकल चलने लगीं तो CSMT, दादर, कुर्ला और ठाणे समेत कई स्टेशनों पर भारी भीड़ और अफरा-तफरी रही। हर कोई घर पहुंचने के लिए ट्रेन पकड़ने की जल्दी में था। रात 8.30 बजे दादर में सेंट्रल लाइन के प्लेटफॉर्म थके और परेशान यात्रियों से भरे थे, और दो ट्रेनों के बीच 15 से 20 मिनट का फासला था। सोशल मीडिया पर भी स्टेशनों के बीच ट्रेन में फंसे लोगों की पोस्ट की बाढ़ आ गई। सैकड़ों यात्रियों के पटरियों पर चलकर नजदीकी स्टेशन तक जाने के नजारे ने पूरे शहर का ध्यान खींचा।

मिड-डे के फोटोग्राफर सैयद समीर आबेदी माटुंगा से आसनगांव फास्ट में चढ़े तो अकेले घाटकोपर पार करने में ही आधे घंटे से ज्यादा लग गया। एक संवाददाता कुर्ला से डोंबिवली स्लो लोकल में बैठा, तो कांजुरमार्ग तक पहुंचने में 90 मिनट लगे और उसके बाद ट्रेन पूरी तरह रुक गई।

डिब्बों में लोकल एक घंटे से ज्यादा बीच रास्ते खड़ी रही तो लोगों का सब्र टूट गया। बुजुर्गों से लेकर किशोरों तक, हर उम्र के यात्री गिट्टी पर कूदकर पटरियों के किनारे नजदीकी स्टेशन की ओर पैदल निकल पड़े। इनमें कीर्ति कॉलेज, डॉन बॉस्को हाई स्कूल और केजे सोमैया कॉलेज के छात्र भी थे। वे उन लाइनों के पास चल रहे थे जहां बीच-बीच में ट्रेनें अब भी गुजर रही थीं। एक वक्त तो सांसें थम गईं, जब बगल की दोनों लाइनों पर एक साथ लोकल आने लगी और साथी यात्रियों के चिल्लाने पर दो कॉलेज छात्रों को पटरी पर नीचे झुककर बैठना पड़ा।

ट्रेन रेंगते हुए विक्रोली पहुंची तो प्लेटफॉर्म के स्टॉल पर पीने के पानी के लिए भगदड़ मच गई। कुछ ही मिनटों में दुकानदार की पूरी शेल्फ खाली हो गई। संवाददाता काउंटर पर पहुंचा तो स्टॉल वाले ने हाथ खड़े कर दिए: "पानी खतम हो गया।"

सेंट्रल रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर डॉ. स्वप्निल नीला ने कहा कि बहाली का काम युद्धस्तर पर किया गया। उनके मुताबिक करीब 9.30 बजे कांजुरमार्ग के सिग्नलिंग हट के अंदर आग लगी, जिससे CTC रैक और S&T उपकरण खराब हो गए और भांडुप-विक्रोली के बीच छहों लाइनों पर सिग्नल बंद हो गए। उन्होंने कहा कि तकनीकी टीमों ने तेजी से काम किया।

नीला ने बताया कि डाउन थ्रू लाइन शाम 4.10 बजे और अप थ्रू लाइन 4.45 बजे चालू करने लायक घोषित हुई, फिर डाउन लोकल लाइन 5.30 बजे चालू हुई। CSMT की ओर अप स्लो सेवाएं भी बहाल की जा रही हैं। आग की सही वजह जांचने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे पटरियों पर न उतरें और न चलें, क्योंकि ट्रेनों की आवाजाही फिर शुरू हो रही है।

गड़बड़ी की दो वजहें रहीं। पहली, ठाणे, मुलुंड और भांडुप स्टेशनों के बीच सिग्नल की खराबी, जो CR कंट्रोल रूम के मुताबिक ओवरहेड लाइन की तकनीकी दिक्कतों से जुड़ी थी। इससे अप और डाउन लाइनों पर स्पीड की पाबंदी लगी और सारी सेवाएं प्रभावित हुईं। मरम्मत और मेंटेनेंस चलने तक यह पाबंदी जारी है। दूसरी, कांजुरमार्ग स्टेशन के पास रिले हट में करीब 9.30 बजे लगी आग, जिसमें अहम उपकरण जल गए। अस्थायी सर्किट चालू हो गए हैं, पर हार्डवेयर पूरी तरह बदलने में करीब 10 दिन लगेंगे।

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