मुंबई दुनिया के तीसरे सबसे प्रदूषित शहर में, हवा बिगड़ी; हाईकोर्ट ने अफसरों को फटकारा
IQAir की रिपोर्ट में मुंबई पांचवें से तीसरे नंबर पर आ गई है। AQI 166 है और हाईकोर्ट ने अफसरों से जवाब मांगा है।
IQAir की रिपोर्ट में सामने आया है कि मुंबई अब दुनिया के तीसरे सबसे प्रदूषित शहर में गिनी जा रही है। शहर की हवा की क्वालिटी काफी बिगड़ गई है। सिर्फ एक हफ्ते के अंदर मुंबई पांचवें नंबर से खिसककर तीसरे नंबर पर आ गई है। IQAir की रिपोर्ट के आंकड़े प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ाने वाले हैं।
मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 166 पर है और दुनिया के 122 शहरों की लिस्ट में मुंबई भी शामिल है। कहा जा रहा है कि बढ़ते तापमान, धीमी पड़ी हवा और नमी की वजह से प्रदूषण बढ़ा है। जानकारों को यह भी अंदेशा है कि 'एल निनो' के असर से प्रदूषण और बढ़ सकता है। शहर में धुआं और धुंध बढ़ने से विजिबिलिटी पर भी असर पड़ा है। इसी वजह से मुंबई वालों की सेहत का सवाल अब सबसे आगे आ गया है।
मुंबई में प्रदूषण का लेवल दिल्ली से भी ऊपर चला जाने पर मुंबई हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि लोग इस वक्त प्रदूषण की मुश्किलें झेल रहे हैं और हालात इमरजेंसी जैसे हैं, तो प्रदूषण रोकने के उपाय लागू कराने की जिम्मेदारी जिन अफसरों पर है, उन्हें चैन की नींद कैसे आ सकती है?
हाईकोर्ट ने महानगरपालिका कमिश्नर के साथ प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कमिश्नर को भी 26 अक्टूबर की अगली सुनवाई में हाजिर रहने का आदेश दिया है। त्योहारों के दौरान होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर अमल नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका के प्रदूषण नियंत्रण मंडल और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया।
सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की है। कोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण रोकने और त्योहारों में पटाखों पर काबू रखने के लिए हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करने में पुलिस बहुत धीमी रफ्तार से काम कर रही है।
हाईकोर्ट ने चेतावनी भी दी है कि ड्यूटी में कोताही करने वाले अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि मुंबई के सभी पुलिस स्टेशनों के प्रभारी अफसरों की मीटिंग लें, ताकि आदेशों पर बहुत सख्ती से अमल हो। महानगरपालिका कमिश्नर और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कमिश्नर को 26 अक्टूबर की सुनवाई में हाजिर होकर यह रिपोर्ट देनी होगी कि आदेशों पर अमल के लिए क्या कदम उठाए गए।
कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि क्या अफसर उसी हवा में सांस ले रहे हैं जिसमें हम लेते हैं, या उनके लिए कोई अलग हवा है जिसका उन्हें एहसास ही नहीं? हाईकोर्ट ने साफ किया कि हमें ऐसी स्थिति नहीं चाहिए कि मुंबई वालों को घर से निकलने से पहले हवा का क्वालिटी इंडेक्स (AQI) देखना पड़े।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।