मुंबई: निर्माण स्थलों के AQI मॉनिटर गड़बड़, आवाज़ फाउंडेशन ने BMC से मांगी कार्रवाई
आवाज़ फाउंडेशन ने बांद्रा और खार के निर्माण स्थलों के AQI डिस्प्ले में गड़बड़ी बताई है और BMC आयुक्त व मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर जांच मांगी है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई में निर्माण स्थलों पर लगे हवा की गुणवत्ता (AQI) मॉनिटरों की रीडिंग में कथित गड़बड़ी को लेकर आवाज़ फाउंडेशन ने चिंता जताई है। फाउंडेशन ने BMC आयुक्त और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर तुरंत जांच की मांग की है।
फाउंडेशन ने बांद्रा और खार के छह से सात निर्माण स्थलों के डिस्प्ले को 38 दिनों में 230 बार देखा। इन रीडिंग को पास के मॉनिटरिंग स्टेशनों की रीडिंग से मिलाया गया।
निगरानी का पहला दौर मार्च से मई के बीच चला और दूसरा सितंबर से अक्टूबर के बीच। 23 मार्च से 5 मई तक फाउंडेशन ने निर्माण स्थलों के बाहर लगे बोर्ड पर दिखने वाली रीडिंग नोट की। फिर उसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के खेरवाड़ी और BKC स्टेशनों की रीडिंग से मिलाया।
फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ बोर्ड पर PM2.5 का स्तर शून्य दिखा। कई बार CPCB के मॉनिटर ज्यादा स्तर दिखा रहे थे, तब भी PM2.5 और PM10 इकाई के अंकों में थे। कुछ बोर्ड पर रीडिंग की जगह सवालिया निशान या डैश दिखे। सितंबर और अक्टूबर में फाउंडेशन ने निर्माण स्थलों की रीडिंग को AQI (US) से मिलाया, जो उसके मुताबिक काफी ज्यादा थी।
आवाज़ फाउंडेशन की सुमैरा अब्दुलअली ने लिखा, "PM2.5 वह धूल है जो इतनी बारीक होती है कि फेफड़ों और खून तक पहुंच जाती है। ये डिस्प्ले यहां रहने वालों को चेताने के लिए हैं, और इनकी जवाबदेही किसी की नहीं है।"
फाउंडेशन ने नगर निगम से कहा है कि हर निर्माण स्थल के मॉनिटर की कैलिब्रेशन और ऑडिट हो, और PM2.5 का रियल-टाइम, समय के साथ दर्ज डेटा ऑनलाइन डाला जाए। उसने लाइव रीडिंग के लिए अलग वेबसाइट, वायु प्रदूषण मापने वाली वैन तैनात करने और खराब डिस्प्ले बोर्ड पर कार्रवाई की भी मांग की है।
अब्दुलअली ने लिखा, "हमें पता है कि BMC ने कहा है कि वह इन साइट मॉनिटरों की रीडिंग को अपने आधिकारिक निष्कर्षों में जोड़ेगी, ताकि स्थानीय डेटा शहर की हवा की तस्वीर का हिस्सा बने। हम इस इरादे का स्वागत करते हैं। लेकिन जब तक कैलिब्रेटेड मीटर से डेटा को पहले सही प्रमाणित नहीं किया जाता, यह कवायद बेमतलब होगी।"
उन्होंने कहा कि लोग बाहर निकलना है या बच्चों को खेलने देना है, यह तय करने के लिए स्थानीय डिस्प्ले बोर्ड पर भरोसा करते हैं। गलत रीडिंग प्रदूषण को लेकर फिक्रमंद लोगों को भटका सकती है।
BMC से संपर्क करने पर अतिरिक्त नगर आयुक्त अविनाश ढाकणे ने कहा कि खुले निर्माण स्थलों के मॉनिटर में खराबी आ सकती है। उन्होंने बताया कि निगम का डैशबोर्ड डेटा पर नजर रखता है और अफसरों को निर्देश दिया गया है कि खराब मॉनिटर तीन दिन में ठीक कराए जाएं।
ढाकणे ने कहा, "वैसे भी ambient AQI और ये कम लागत वाले सेंसर एक-दूसरे से तुलना लायक नहीं हैं। निर्माण स्थलों के सेंसर का मकसद BMC को 'हॉटस्पॉट मॉनिटरिंग' में मदद करना है। जब एक ही इलाके के कई निर्माण स्थलों के बोर्ड पर ऊंचे आंकड़े दिखते हैं, तो हमारे अफसर तुरंत दखल देते हैं। मुंबई में AQI 100 से 120 के बीच यानी मध्यम दर्ज हो रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि BMC ऐसे मामलों को अपने आप पकड़ने के लिए डैशबोर्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जोड़ने पर काम कर रही है।
रिपोर्ट में दर्ज मामलों में 13 अप्रैल को पाली हिल के पास PM2.5 शून्य दिखाया गया। 24 अप्रैल को पाली हिल के पास PM2.5 और PM10 दोनों शून्य दिखे।
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