पटाखा बैन तोड़ने पर हाई कोर्ट नाराज़, मुंबई पुलिस, BMC और MPCB को लगाई लताड़
नवरात्रि और दशहरा में पटाखों और शोर पर रोक न लगा पाने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस, BMC और MPCB को कड़ी फटकार लगाई है।
नवरात्रि और दशहरा के दौरान पटाखों और शोर पर रोक नहीं लग पाई। इस पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) और महाराष्ट्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (MPCB) की कड़ी आलोचना की है।
कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिए थे कि पब्लिक जगहों और सड़कों पर पटाखे न जलाए जाएं और शोर का लेवल काबू में रखा जाए। इसके बावजूद त्योहारों में नियम टूटे। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि लोकल पुलिसवालों को इन निर्देशों की जानकारी क्यों नहीं थी और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की डिवीजन बेंच ने मुंबई पुलिस कमिश्नर, BMC कमिश्नर और MPCB के मेंबर सेक्रेटरी को सोमवार को कोर्ट में हाज़िर होने को कहा है। इन्हें बताना होगा कि आदेशों का पालन करवाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। बेंच ने चेतावनी भी दी कि अगर अधिकारी निर्देश लागू करने में लापरवाही करते रहे, तो संबंधित अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है और उनके खिलाफ कंटेम्प्ट की कार्रवाई शुरू हो सकती है।
कोर्ट ने मुंबई में बढ़ते हवा और आवाज़ के प्रदूषण पर भी चिंता जताई। बिगड़ते हालात पर धीमी कार्रवाई के लिए उसने राज्य सरकार और सिविक अधिकारियों की आलोचना की। बेंच ने कहा कि शहर में प्रदूषण का लेवल गंभीर चिंता का विषय बन गया है और कथित तौर पर यहां दिल्ली जैसे या उससे भी बुरे हालात हैं।
कोर्ट ने पूछा कि जब प्रदूषण लाखों लोगों पर असर डाल रहा था और इमरजेंसी उपायों की ज़रूरत थी, तब अधिकारी चुप कैसे रह सकते थे। उसने भारी स्मॉग और कम विज़िबिलिटी की रिपोर्टों का भी ज़िक्र किया और कहा कि पब्लिक अवेयरनेस बढ़ाने और लोगों के व्यवहार में बदलाव की ज़रूरत है। बेंच ने कंस्ट्रक्शन से जुड़े प्रदूषण और गैर-कानूनी कचरा डंपिंग के खिलाफ असरदार कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाया और कहा कि नियम और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर ज़्यादातर कागज़ों पर ही दिखते हैं।
पटाखों की पाबंदी और शोर कंट्रोल को लेकर कोर्ट के 22 सितंबर और 15 अक्टूबर के आदेश थे। इसके बावजूद पब्लिक नोटिस ठीक से जारी नहीं किए गए, इस पर कोर्ट ने नाराज़गी जताई। अब अधिकारियों को 24 अक्टूबर तक अखबारों और सोशल मीडिया के ज़रिए इन पाबंदियों की जानकारी देनी होगी। पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन में यह भी बताना होगा कि पटाखों से हवा की क्वालिटी और इंसानी सेहत को क्या नुकसान होता है। बेंच ने साफ कहा कि सिर्फ़ आदेश जारी करने से समस्या हल नहीं होगी, जब तक अधिकारी उन्हें ज़मीन पर असरदार तरीके से लागू न करें।
कोर्ट को यह जानकर हैरानी हुई कि कई थानों के पुलिसवालों को कथित तौर पर उसके निर्देशों का पता ही नहीं था। उसने पूछा कि भीड़-भाड़ वाली सड़कों पर पटाखे फोड़े जा रहे थे और बिना ज़रूरी इजाज़त के जुलूस निकल रहे थे, तब पुलिस ने दखल क्यों नहीं दिया।
मुंबई पुलिस कमिश्नर को पक्का करना होगा कि सभी पुलिस स्टेशन इंचार्ज को कोर्ट के आदेशों की जानकारी दी जाए। कमिश्नर को एक एफिडेविट भी जमा करना होगा, जिसमें कन्फर्म किया गया हो कि निर्देश बताए और लागू किए जा रहे हैं।
लाखों नागरिकों की सेहत पर प्रदूषण के असर का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि पब्लिक हेल्थ को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अधिकारियों ने जितनी तेज़ी दिखानी थी, वह नहीं दिखी, इस पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया। बेंच ने ज़ोर दिया कि सिर्फ़ नियम बनाने से बात नहीं बनेगी, उन्हें असरदार तरीके से लागू करना ज़रूरी है। संबंधित विभागों को अपनी स्थिति बतानी होगी और कोर्ट के पहले के आदेशों का पालन करना होगा।
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