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मुंबई की हवा दिल्ली से भी खराब, हाईकोर्ट ने प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

मुंबई हाईकोर्ट ने बढ़ते वायु प्रदूषण पर नाराजगी जताई और सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगाकर सख्ती से अमल के निर्देश दिए।

दिवाली अब कुछ ही दिन दूर है और त्योहार का जोश बढ़ रहा है। लेकिन इसी बीच मुंबई के प्रदूषण को लेकर चिंता भी बनी हुई है। त्योहारों के दौरान शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण का गंभीर नोटिस लेते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रशासन पर कड़ी नाराजगी जताई।

कोर्ट ने हैरानी जताई कि मुंबई समुद्र किनारे बसी है और यहां हवा के चलने के लिए कुदरती तौर पर अच्छे हालात हैं, फिर भी प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी ऊपर जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति बेहद चौंकाने वाली है।

वायु और ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कोर्ट पहले जो आदेश दे चुका है, उन पर असरदार अमल नहीं हो रहा। इसी वजह से कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) और पुलिस को आड़े हाथों लिया। साथ ही सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगाते हुए उस पर सख्ती से अमल करने को कहा।

हाईकोर्ट ने शहर की सार्वजनिक सड़कों, गली-मोहल्लों और फुटपाथ पर पटाखे फोड़ने पर पाबंदी लगा दी है। मुंबई महानगरपालिका आयुक्त और मुंबई पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि इस आदेश पर कड़ाई से कैसे अमल हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी देने वाला हलफनामा (affidavit) 26 अक्टूबर तक पेश करें। जो लोग इस पाबंदी को तोड़ें, उन पर कार्रवाई के लिए मानक कार्यप्रणाली (SOP) बनाने का निर्देश भी दिया गया है। सड़कों पर खुलेआम पटाखे फूट रहे हैं और प्रशासन से काफी कार्रवाई नहीं हो रही, इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई।

AQI.in वेबसाइट के मुताबिक पिछले एक हफ्ते में मुंबई का हवा गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 150 से 200 के बीच रहा। यह स्तर सेहत के लिए नुकसानदेह माना जाता है। कोर्ट ने यह भी बताया कि जुलूसों में लाउडस्पीकर और म्यूजिक सिस्टम के लिए जरूरी पहले से इजाजत नहीं ली जाती। आवाज की हदों का पालन होने की गारंटी भी नहीं दी जाती। भीड़ वाली सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर भी कोई काबू नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होता दिख रहा है।

न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि मुंबई की भौगोलिक खूबियों का पूरा फायदा नहीं उठाया जा रहा। खंडपीठ ने कहा, "यह बेहद चौंकाने वाली बात है। मुंबई को समुद्र से आने वाली हवा का फायदा मिलता है। शहर में कई खुली जगहें हैं और समुद्र का बड़ा खुला इलाका भी है। फिर भी हमें इस हालात का सामना करना पड़ रहा है। आपको पक्का करना चाहिए कि मुंबई का आसमान साफ रहे।"

कोर्ट ने मुंबई पुलिस आयुक्त से कहा है कि वे सभी पुलिस स्टेशनों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाकर पटाखों पर रोक के आदेश की जानकारी दें। अस्पताल, सरकारी दफ्तर, अदालतें और स्कूलों के आसपास के 'शांति क्षेत्रों' (Silence Zones) में पटाखे फोड़ने पर पूरी पाबंदी लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ना मना है, यह बात लोगों तक पहुंचाने के लिए अभियान चलाने में नाकाम रहने पर कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी फटकारा।

न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने सवाल उठाया कि जब लाखों लोग प्रदूषण की आपात स्थिति से जूझ रहे हैं, तब अमल की जिम्मेदारी वाले अधिकारी चैन से कैसे सो सकते हैं। कोर्ट ने 22 सितंबर को दिए गए आदेश पर भी सख्ती से अमल करने को कहा है। उस आदेश के मुताबिक लाउडस्पीकर वाले जुलूसों में पुलिस की दी हुई आधिकारिक इजाजत की कॉपी साफ दिखाना जरूरी है।

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