बॉम्बे हाई कोर्ट: प्रदूषण विरोधी अभियानों में मशहूर हस्तियां मुफ़्त में शामिल हों
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ की आलोचना की है, जिन्होंने हवा और आवाज़ के प्रदूषण के खिलाफ़ जागरूकता कैंपेन में हिस्सा लेने के लिए कथित तौर पर फीस मांगी। कोर्ट का कहना है कि सोशल काम के लिए सेलेब्रिटीज़ को बुलाने पर जनता का पैसा खर्च नहीं होना चाहिए।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और नीला गोखले की डिवीजन बेंच ने सोमवार को यह टिप्पणी की। बेंच यह बात तब बोली, जब महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि कुछ सेलेब्रिटीज़ बिना पेमेंट के हिस्सा लेने को तैयार नहीं हैं।
बेंच ने कहा कि जिन सेलेब्रिटीज़ को मुंबई से फायदा हुआ है, उन्हें इस शहर का पर्यावरण बचाने की कोशिशों में अपनी मर्ज़ी से योगदान देना चाहिए। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि उन मराठी एक्टर्स से संपर्क किया जाए, जो बिना फीस लिए हिस्सा लेने को तैयार हैं।
पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर बेंच ने ज़ोर देकर कहा कि इसके खिलाफ़ जागरूकता कैंपेन सिर्फ त्योहारों तक नहीं रुकने चाहिए, बल्कि त्योहारों के बाद भी जारी रहने चाहिए। कोर्ट ने अपील की कि स्कूलों और झुग्गी-झोपड़ियों वाले इलाकों में ज़्यादा लोगों तक पहुंचा जाए, जहां कथित तौर पर देर रात तक पटाखे फोड़े जाते हैं।
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए वे विज्ञापन, सोशल मीडिया, पब्लिक अनाउंसमेंट और स्थानीय प्रतिनिधियों का सहारा लें। इसी बीच बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने बताया कि शोर से जुड़ी शिकायतें उसकी मौजूदा हेल्पलाइन 1916 पर दर्ज कराई जा सकती हैं।
कोर्ट ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जश्न मनाने और पर्यावरण की ज़िम्मेदारी निभाने के बीच बैलेंस बनाना ज़रूरी है। नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए उसने सिविक अधिकारियों, पुलिस और प्रदूषण कंट्रोल अधिकारियों से कहा कि वे सब मिलकर कोशिश करें।
इस मामले की आगे की सुनवाई 25 नवंबर को होनी है।
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