यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर के खिलाफ नागपुर के व्यापारियों ने स्कैनर ढंके, मनाया 'नो यूपीआई डे'
नागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के आह्वान पर व्यापारियों ने यूपीआई पर प्रस्तावित 0.4% एमडीआर का विरोध किया।
यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में शुक्रवार को नागपुर के व्यापारियों ने 'नो यूपीआई डे' मनाया। यह आह्वान नागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने किया था। कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों में यूपीआई स्कैनर पर काला कपड़ा ढंक दिया। यह सांकेतिक विरोध था। इसकी तस्वीरें व्यापारियों ने चैंबर को भेजीं।
चैंबर के अध्यक्ष प्रदीप जाजू ने कहा कि 2,000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई लेन-देन पर 0.4% एमडीआर प्रस्तावित है। इससे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। उनके मुताबिक भले ही यह शुल्क सीधे ग्राहक से लेने का प्रावधान न हो, पर व्यापार की लागत बढ़ने का असर आखिर में कीमतों और ग्राहकों पर पड़ सकता है। जाजू ने सरकार से मांग की कि वह प्रस्तावित एमडीआर पर फिर से सोचे और इसे वापस ले।
चैंबर के पूर्व अध्यक्ष सीए कैलाश जोगानी ने कहा कि यूपीआई आज व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों के लिए पेमेंट का बहुत जरूरी जरिया बन चुका है। ऐसे में इस पर कोई भी अतिरिक्त लागत छोटे और मध्यम व्यापारियों की परेशानी बढ़ा सकती है। उनका कहना था कि सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे, तो उसकी लागत का भी ध्यान रखे।
जोगानी ने 30 सितंबर से भारत में एप्पल पे की शुरुआत का जिक्र किया। उनके मत में अंतरराष्ट्रीय पेमेंट व्यवस्था और क्रेडिट कार्ड आधारित पेमेंट को बढ़ावा दिए जाने के बीच यूपीआई पर एमडीआर लगाने की नीति पर सरकार को व्यापक नजरिए से विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक डिजिटल रुपया आम जनता के लिए पूरी तरह व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर उपलब्ध न हो जाए, तब तक यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं लगना चाहिए।
चैंबर के सचिव तरुण निर्वाण और पूर्व अध्यक्ष गोविंद पसारी ने भी सरकार से कहा कि व्यापारियों की चिंताओं को देखते हुए एमडीआर का फैसला जल्द वापस लिया जाए। चैंबर के पदाधिकारियों ने साफ किया कि व्यापारियों का यह विरोध यूपीआई या डिजिटल पेमेंट के खिलाफ नहीं है। वे सिर्फ इस पर अतिरिक्त लागत लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं।
व्यापारियों ने सरकार से अपील की कि बातचीत के जरिए इस समस्या का हल निकाला जाए। इस मौके पर वसंत पालीवाल, निखिल काकानी, विनोद पवार, शंकरलाल खंडेलवाल, महेश बंग, विवेक उखलकर, संदीप खेमका, महेन्द्र कटारिया, आशीष खंडेलवाल, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, रवींद्र चांडक, प्रशांत जग्यासी, नाथाभाई पटेल और संजय पांडे मौजूद थे।
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