मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:12 IST

15 अक्टूबर से पहले ही UPI लेनदेन घटे, सितंबर में 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन

MDR लागू होने से पहले सितंबर में UPI लेनदेन की संख्या और कुल मूल्य दोनों अगस्त से कम रहे।

15 अक्टूबर से पहले ही UPI लेनदेन घटे, सितंबर में 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

देशभर में 15 अक्टूबर से UPI पेमेंट पर MDR लागू होने जा रहा है। 2000 रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4 % MDR लगेगा। भारत सरकार के इस फैसले का देशभर में विरोध हो रहा है, खासकर व्यापारियों में नाराजगी है।

इसके खिलाफ 2 ऑक्टोबर को आंदोलन होने वाला था, लेकिन वित्त मंत्री के साथ हुई बैठक के बाद यह आंदोलन वापस ले लिया गया। फिर भी इस फैसले का असर देशभर में दिखने लगा है, और इसकी बड़ी वजह UPI लेनदेन में आई गिरावट है।

जैसे ही सरकार ने MDR को लेकर फैसला लिया, सितंबर में UPI लेनदेन की संख्या में बड़ी गिरावट दिखी। अगस्त के मुकाबले यह गिरावट 1.8 टक्का रही। आंकड़े में छोटी लगने वाली यह गिरावट पूरे भारत के हिसाब से काफी बड़ी है। रिझर्व बैंक के जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में UPI के जरिए 2407 करोड़ लेनदेन हुए, जबकि अगस्त में यह संख्या 2450 करोड़ थी।

लेनदेन की कुल कीमत देखें तो सितंबर में 1.5 टक्का की गिरावट के साथ यह 29.37 लाख करोड़ रुपये पर आ गई। अगस्त के आंकड़ों में यह कीमत 29.82 लाख करोड़ रुपये थी। इस पूरे सिस्टम को नॅशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI चलाती है।

इसमें एक पेच भी है। सितंबर में महीने भर के लेनदेन की संख्या भले घटी दिखती है, लेकिन रोज के औसत लेनदेन बढ़े हैं। अगस्त 31 दिन का महीना था, इसलिए उसमें कुल लेनदेन ज्यादा रहे। सितंबर में 30 दिन थे, इसलिए कुल संख्या कम दिख रही है। सितंबर में रोज औसतन 80.2 करोड़ UPI लेनदेन हुए, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 79.1 करोड़ था।

NPCI के चलाए जाने वाले इमिजिएट पेमेंट सर्विसेस यानी IMPS सिस्टम पर सितंबर में 35.40 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत 7.05 लाख करोड़ रुपये थी। रिझर्व बैंक के रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट यानी RTGS सिस्टम पर सितंबर में 3.25 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत 235.71 लाख करोड़ रुपये रही।

आंकड़े अभी भले ऐसे सामने आ रहे हों, पर असली खेल 15 अक्टूबर से शुरू होगा। अगर MDR का नियम जैसा है वैसा ही रहा, तो आम लोगों और व्यापारियों पर इसका क्या असर पड़ता है, यह देखना होगा। इतना तय है कि इस नियम का असर लेनदेन और पेमेंट के तरीके पर पड़ेगा।

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