मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:15 IST

केंद्र सरकार छोटे कारोबारों के लिए 10000 करोड़ रुपये के ग्रोथ फंड की तैयारी में

एसएमई ग्रोथ फंड पर केंद्रीय मंत्रिमंडल 6 अक्टूबर को विचार कर सकता है, सूत्रों के मुताबिक।

केंद्र सरकार छोटे कारोबारों के लिए 10000 करोड़ रुपये के ग्रोथ फंड की तैयारी में
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

देश के छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। 10000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिमंडल 6 अक्टूबर को इस प्रस्ताव पर विचार कर सकता है।

यह फंड खास तौर पर उन छोटे कारोबारों और कंपनियों के लिए है, जिनमें बढ़कर बड़ा कारोबार बनने की क्षमता है, लेकिन पैसे की कमी की वजह से वे अपनी रफ्तार नहीं बढ़ा पा रहे। सरकार ने इस फंड का ऐलान 2026-27 के केंद्रीय बजट में किया था। इसका मकसद उन कारोबारों को इक्विटी सपोर्ट देना है, जो फैलकर बड़े बन सकते हैं।

एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। छोटे शहरों से लेकर बड़े औद्योगिक इलाकों तक इस सेक्टर में लाखों कारोबार चल रहे हैं। मगर कई छोटे कारोबारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की है। कारोबार फैलाना हो, नई मशीनें खरीदनी हों, उत्पादन बढ़ाना हो या नए बाजारों में उतरना हो, हर काम के लिए पैसा चाहिए। ऐसे में हर कारोबारी के लिए बैंक से कर्ज लेना आसान रास्ता नहीं है। इसीलिए ऐसे कारोबारों को बढ़ने में मदद देने के लिए यह सरकारी फंड बनाया गया है।

यह फंड हर एमएसएमई को सीधे बांटी जाने वाली योजना नहीं है। सरकार ने इसे कुछ चुने हुए पैमानों के आधार पर उम्मीद जगाने वाले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बनाया है। यानी तेजी से बढ़ने की क्षमता रखने वाली कंपनियों को इस फंड से इक्विटी सपोर्ट दिया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य ऐसे कारोबारों को आगे बढ़ाना है, जो बड़े और मजबूत भारतीय उद्योग बन सकें।

एसएमई ग्रोथ फंड बैंक का कर्ज नहीं है। सरकार ने इसे एमएसएमई के लिए इक्विटी सपोर्ट के तौर पर पेश किया है। जिन कारोबारों को विस्तार के लिए पूंजी चाहिए, उन्हें बढ़ने के लिए पूंजी मुहैया कराना इसका मकसद है। इसलिए इस फंड को पाने की प्रक्रिया आम कमर्शियल कर्ज से अलग हो सकती है।

सरकार सिर्फ पैसे की मदद नहीं दे रही। बजट 2026-27 में एमएसएमई सेक्टर के लिए तीन स्तर की योजना बनाई गई है: इक्विटी सपोर्ट, लिक्विडिटी सपोर्ट और प्रोफेशनल सपोर्ट। 10000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड के अलावा आत्मनिर्भर भारत फंड में 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद का भी प्रस्ताव है। इसका मकसद सूक्ष्म उद्योगों के लिए जोखिम पूंजी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद करना है। इसके अलावा एमएसएमई की पेमेंट और वर्किंग कैपिटल की दिक्कतें सुलझाने के लिए सरकार ने TReDS से जुड़े कई उपायों का ऐलान किया है।

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