यूक्रेन ने रूस की यांडेक्स के दो डेटा सेंटरों पर ड्रोन से किए हमले
यूक्रेन ने दो दिन में रूस की टेक कंपनी यांडेक्स के दो डेटा सेंटरों पर ड्रोन से हमले किए। इनमें AI मॉडल तैयार करने वाले सुपरकंप्यूटर भी हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
रूस और यूक्रेन के बीच की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। अब यह लड़ाई कई मोर्चों पर चल रही है। यूक्रेन पहले ही रूस के तेल भंडार पर हमला करने का दावा कर चुका है। दोनों देश एक-दूसरे के डिजिटल ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं।
अब खबर आई है कि यूक्रेन ने रूस की अग्रणी टेक्नोलॉजी कंपनी यांडेक्स (Yandex) के डेटा सेंटरों पर ड्रोन से हमले किए हैं। इन हमलों का असर उन कंप्यूटरों पर पड़ सकता है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तैयार करने के काम आते हैं।
पहला हमला गुरुवार, 8 अक्टूबर को रियाजान इलाके के सासोवो में यांडेक्स के डेटा सेंटर पर हुआ। हमले के बाद सेंटर में आग लग गई और उसका कामकाज पूरी तरह रोकना पड़ा। इसके अगले दिन, शुक्रवार 9 अक्टूबर को मॉस्को के दक्षिण-पश्चिम में कालुगा इलाके में यांडेक्स के दूसरे डेटा सेंटर पर भी ड्रोन हमला हुआ। कंपनी ने बताया कि इस हमले में सेंटर के कुछ मॉड्यूल पूरी तरह बंद पड़ गए। कंपनी का कहना है कि दूसरे हमले में डेटा सेंटर को नुकसान पहुंचा है और कुछ सेवाओं में रुकावट आ सकती है।
सासोवो के डेटा सेंटर में यांडेक्स के तीन में से दो सुपरकंप्यूटर रखे गए हैं। इन आधुनिक कंप्यूटरों का इस्तेमाल कंपनी के AI मॉडल बनाने और उन्हें ट्रेन करने के लिए होता है। इसलिए इस सेंटर पर हुआ हमला रूस के AI सेक्टर के लिए अहम साबित हो सकता है।
हमले के बाद सेंटर के उपकरणों को कितना नुकसान हुआ, इसकी जांच कंपनी कर रही है। जो सिस्टम खराब हुए हैं, वे दोबारा चालू हो पाएंगे या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। इन हमलों से यांडेक्स की कुछ डिजिटल सेवाओं पर असर पड़ा था।
पिछले कुछ हफ्तों में रूस ने यूक्रेन के डेटा सेंटरों और दूरसंचार ढांचे पर हमले किए हैं। इससे यूक्रेन में इंटरनेट सेवा और डिजिटल व्यवस्था को झटका लगा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के हमलों का जवाब देने की बात कही है।
तस्वीर यह बन रही है कि दोनों देश अब ऊर्जा प्रोजेक्ट, तेल रिफाइनरी, बंदरगाह और डिजिटल सेंटरों को निशाना बना रहे हैं। यांडेक्स के दो सेंटरों पर हुए हमलों से इस संघर्ष में टेक्नोलॉजी का महत्व सामने आया है। लेकिन AI सिस्टम को असल में कितना नुकसान हुआ और इसका लंबे समय में क्या असर होगा, यह अभी साफ नहीं है।