शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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विश्व बैंक की रिपोर्ट: 2011 से 2023 के बीच भारत में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले

विश्व बैंक की रिपोर्ट: 2011 से 2023 के बीच भारत में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दशक में भारत में गरीबी में दुनिया की सबसे तेज गिरावट दर्ज हुई है। रोजगार बढ़ा, पर वेतन की असमानता अब भी बड़ी है।

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दशक में भारत में गरीबी में जितनी तेजी से कमी आई, उतनी दुनिया में कहीं दर्ज नहीं हुई। रिपोर्ट कहती है कि 2011 से 2023 के बीच अंदाजन 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

रिपोर्ट में दो पैमानों पर आंकड़े दिए गए हैं। निम्न-मध्यम आय वर्ग की रेखा प्रतिदिन 4.2 अमेरिकी डॉलर (2021 पीपीपी) रखी गई है। इस रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का हिस्सा 2011 से 2023 के बीच 57.7 फीसदी से घटकर 16.1 फीसदी रह गया। वहीं अत्यंत गरीबी, यानी प्रतिदिन 3.00 अमेरिकी डॉलर से नीचे, में रहने वाली आबादी का हिस्सा इसी दौरान 27.1 फीसदी से गिरकर 2.6 फीसदी पर आ गया।

विश्व बैंक ने इस गिरावट का श्रेय तीन बातों को दिया है। पहली, खपत में जोरदार बढ़ोतरी। दूसरी, रोजगार का बढ़ना, खासकर महिलाओं के बीच। तीसरी, खाद्य सब्सिडी समेत सामाजिक ट्रांसफर का दायरा बढ़ना।

आगे के बारे में रिपोर्ट का अंदाज है कि गरीबी घटने का सिलसिला धीमी रफ्तार से ही सही, पर चलता रहेगा। विश्व बैंक की उम्मीद है कि रोजाना 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा के नीचे की आबादी का हिस्सा 2026 के 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी पर आ जाएगा। यह अनुमान है, नतीजा नहीं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि जैसे-जैसे गरीबी घट रही है, वह उन परिवारों में ज्यादा सिमटती जा रही है जहां पढ़ाई कम है, संपत्ति कम है, रोजगार के मौके कम हैं और जिन पर निर्भर रहने वाले सदस्य ज्यादा हैं। वेतन की असमानता भी काफी बड़ी है। विश्व बैंक के मुताबिक 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की औसत कमाई सबसे कम कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की औसत कमाई के लगभग 13 गुना होगी।

रोजगार के मोर्चे पर रिपोर्ट कहती है कि हाल में, 2017 से 2023 के बीच, रोजगार में अंदाजन 134 मिलियन लोगों की बढ़ोतरी हुई। यह बढ़ोतरी काम करने की उम्र वाली आबादी के बढ़ने की रफ्तार से लगभग दोगुनी है। इसका बड़ा हिस्सा ग्रामीण महिलाओं के तनख्वाह वाले काम में उतरने से आया है, जिससे हर परिवार में कमाने वालों की गिनती बढ़ी है।

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