वर्ल्ड बैंक: 2011 से 2023 तक भारत में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से निकले, 2028 तक और कमी का अनुमान
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वर्ल्ड बैंक के अक्टूबर 2026 के Poverty & Equity Brief में भारत में गरीबी घटने, रोजगार बढ़ने और 99 प्रतिशत आबादी तक बिजली पहुंचने के आंकड़े दर्ज हैं।
वर्ल्ड बैंक ने अक्टूबर 2026 की अपनी Poverty & Equity Brief जारी की है। इसके मुताबिक भारत में गरीबी जितनी तेजी से कम हुई, वैसी गिरावट दुनिया में गिनी-चुनी जगहों पर ही दिखी है। रिपोर्ट कहती है कि 2011 से 2023 के बीच करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आ गए।
रिपोर्ट में गरीबी नापने के दो पैमाने लिए गए हैं, और दोनों 2021 की परचेजिंग पावर पैरिटी पर टिके हैं। पहला पैमाना लोअर-मिडल-इनकम गरीबी रेखा का है, यानी रोज के 4.20 डॉलर प्रति व्यक्ति। इस रेखा से नीचे जीने वालों की हिस्सेदारी 2011 में 57.7 प्रतिशत थी और 2023 में सिर्फ 16.1 प्रतिशत बची। दूसरा पैमाना अति गरीबी का है, यानी रोज के 3 डॉलर से कम में गुजारा। इसमें आंकड़ा 27.1 प्रतिशत से उतरकर 2.6 प्रतिशत पर आ गया।
वर्ल्ड बैंक ने इस सुधार के पीछे तीन वजहें बताई हैं। एक, लोगों की खपत में अच्छा उछाल। दो, काम के मौके बढ़ना, खासकर औरतों के लिए। तीन, खाद्य सब्सिडी जैसी कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक ट्रांसफर का फैलाव।
नौकरी-धंधे की तस्वीर भी रिपोर्ट में है। 2017 से 2023 के बीच करीब 13.4 करोड़ (134 मिलियन) लोगों को नया रोजगार मिला। यह इजाफा काम की उम्र वाली आबादी के बढ़ने की रफ्तार से लगभग दोगुना है। इसमें सबसे बड़ा योगदान गांव की महिलाओं का रहा, जो बड़ी संख्या में पैसे वाले काम में उतरीं। इससे हर घर में कमाने वालों की गिनती और घर की कुल आमदनी, दोनों बढ़ीं।
रिपोर्ट के अनुसार गांव और शहर, दोनों जगह लोगों के रहन-सहन में सुधार आया है। गांवों में तरक्की ज्यादा तेज रही, इसलिए दोनों के बीच की खाई कुछ घटी है। 2022 के सर्वे का हवाला देकर बैंक ने यह भी लिखा है कि देश की 99 प्रतिशत आबादी तक बिजली का कनेक्शन पहुंच चुका है।
आगे को लेकर रिपोर्ट का अनुमान है कि गरीबी घटती रहेगी, भले रफ्तार धीमी हो। 4.20 डॉलर वाली रेखा के नीचे की आबादी 2026 में 14.2 प्रतिशत आंकी गई है और बैंक को उम्मीद है कि 2028 तक यह 12.1 प्रतिशत रह जाएगी। बैंक ने साफ किया है कि यह अनुमान है, नतीजा नहीं।
रिपोर्ट एक चिंता भी दर्ज करती है। जैसे-जैसे गरीबी घट रही है, बची हुई गरीबी उन परिवारों में सिमट रही है जहां पढ़ाई कम है, जायदाद कम है, कमाई के मौके कम हैं और जिन पर निर्भर रहने वाले सदस्य ज्यादा हैं। वेतन की गैरबराबरी भी बड़ी है। बैंक के हिसाब से 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 प्रतिशत कामगारों की औसत आमदनी सबसे कम कमाने वाले 10 प्रतिशत कामगारों से लगभग 13 गुना होगी।
केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30 अक्टूबर 2026 को ये आंकड़े X पर साझा किए। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार की लगातार कोशिशों का ठोस असर दिख रहा है और इससे समावेशी विकास की नींव मजबूत हो रही है। उनके मुताबिक इसी वजह से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को जनता का भरोसा और जनादेश मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस रफ्तार को आगे ले जाने के लिए पक्के इरादे से जुटी है। इसके लिए वह उत्पादक रोजगार, घरों की ज्यादा आमदनी और सरकारी सेवाओं की असरदार डिलीवरी पर जोर देगी, ताकि लोगों की उम्मीदें पूरी हो सकें।
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