विजयादशमी पर घट विसर्जन के मुहूर्त, 20 अक्टूबर को ये हैं वक्त
आज 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को दशहरा यानी विजयादशमी है और शारदीय नवरात्र का समापन हो रहा है।
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आज 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार है और आज दशहरा यानी विजयादशमी है। आज का दिन साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक मुहूर्त माना जाता है। आज ही शारदीय नवरात्र खत्म हो रहा है। नौ दिन तक देवी की पूजा के बाद घर-घर में घट हटाने और देवी की मूर्ति को विदा करने की तैयारी चल रही है।
कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि घट कब हटाना है और देवी का विसर्जन कब करना है, नवमी को या दशमी को। इसी बारे में पूरी जानकारी यहां दी जा रही है।
पंचांग के मुताबिक आज विजयादशमी है। आज का विजय मुहूर्त दोपहर 2:09 से 2:56 बजे तक है। इसे विजयादशमी की पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इसके अलावा आज का अपराह्ण काल दोपहर 1:23 से 3:42 बजे तक है।
एक बात ध्यान रखनी है कि विजय मुहूर्त का मतलब विसर्जन का मुहूर्त नहीं है। विसर्जन के लिए अलग वक्त देखना पड़ता है और वह हर जगह के पंचांग के हिसाब से बदल सकता है। इसलिए यह न समझें कि एक ही वक्त सब जगह लागू होगा।
अगर आज घट विसर्जन करना हो तो कुछ शुभ वक्त बताए गए हैं। सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक एक अच्छा मुहूर्त है। उसके बाद अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक है। और दोपहर 1:14 से 3:30 बजे तक भी घट विसर्जन किया जा सकता है।
ये वक्त हर जगह एक जैसे हों, ऐसा जरूरी नहीं। आपके गांव या शहर का पंचांग अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखकर ही मुहूर्त तय करें।
घट नवमी को हटाना है या दशमी को, इस पर हर घर की अपनी रीत होती है। कुछ घरों में महानवमी के दिन, यानी कल ही, देवी की पूजा, हवन और आरती करके घट विसर्जित कर दिया जाता है। कुछ घरों में दशहरा के दिन पूजा करके घट हटाया जाता है और नवरात्र में बोया गया अनाज, यानी जौ, विसर्जित किया जाता है।
इसलिए इसमें कोई एक नियम नहीं है। आपके घर में जो परंपरा सालों से चली आ रही है, वही निभाएं। बड़ों से पूछें और वे जैसा बताएं वैसा करें। कुलाचार अहम होता है।
घट या देवी की मूर्ति का विसर्जन करते वक्त जल्दबाजी न करें। सबसे पहले देवी की पूजा और आरती करें और नैवेद्य दिखाएं। फिर पूजा में कोई चूक हुई हो तो देवी से माफी मांगें और प्रार्थना करें।
घट पर रखा नारियल और पूजा का बाकी सामान अपने घर की रीत के हिसाब से अलग निकालें। घट का पानी तुलसी जैसे पौधे में डाला जा सकता है। नवरात्र में बोया गया अनाज मिट्टी में विसर्जित करें, कचरे में न फेंकें।
अगर घर में बड़ी मूर्ति है तो उसे नदी या तालाब में विसर्जित करते वक्त प्रशासन के बनाए नियम मानें। जहां कृत्रिम तालाब की सुविधा हो, वहीं विसर्जन करें। हो सके तो पर्यावरण के अनुकूल मूर्ति लाएं और उसी तरीके से विसर्जन करें।
आखिर में, विजय मुहूर्त का वक्त ही विसर्जन के लिए जरूरी है, ऐसा न मानें। घट विसर्जन और देवी विसर्जन दो अलग बातें हैं और घर की परंपरा के मुताबिक अलग-अलग वक्त पर हो सकती हैं। अपने शहर का पंचांग और घर का कुलाचार देखकर ही फैसला लें।