विदर्भ को माइनिंग कैपिटल बनाने की तैयारी, वेकोलि CMD पांडे ने गिनाईं गैसीफिकेशन और रेयर अर्थ की ताकत
वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक हेमंत शरद पांडे का कहना है कि विदर्भ माइनिंग कैपिटल बनने की तरफ बढ़ रहा है।
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वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक हेमंत शरद पांडे का कहना है कि विदर्भ देश की माइनिंग कैपिटल बनने की राह पर है। उनके मुताबिक माइनिंग कैपिटल के लिए विदर्भ से अच्छा विकल्प हो ही नहीं सकता।
पांडे ने बताया कि विदर्भ की असली ताकत यहां का खनिज है। कोयला, मैंगनीज, आयरन ओर और लाइमस्टोन समेत कई तरह के खनिजों का यहां बड़ा भंडार है। सबसे खास बात यह है कि खनिज खोजने से लेकर खनन करने वाली कंपनियां तक एक ही दायरे में मौजूद हैं। उनका कहना है कि खोज, उत्पाद और शोध से जुड़ी तमाम सुविधाएं एक ही शहर में हैं और ऐसा संयोग देश में कहीं और देखने को नहीं मिलता।
उन्होंने बताया कि खनिजों के नियम बनाने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) का मुख्यालय नागपुर में है। यह संस्था गौण खनिज क्षेत्र को नियंत्रित करती है और विकास का रोड मैप तैयार करती है। देश में खनिज कहां है और कितना है, इसका पता लगाने वाली सबसे बड़ी पब्लिक सेक्टर यूनिट एमईसीएल का मुख्यालय भी यहीं है। मैंगनीज की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी मॉयल का मुख्यालय भी नागपुर में है। कोयले के लिए वेकोलि है और शोध के लिए प्रमुख संस्था सिंफर का साथ मिल रहा है।
पांडे के मुताबिक इन सरकारी कंपनियों के साथ अब निजी क्षेत्र की कंपनियां भी खनन क्षेत्र में लाखों करोड़ रुपये का निवेश कर रही हैं। उनका कहना है कि ऐसा इको सिस्टम देश के किसी और हिस्से में नहीं है। पहले विदर्भ खनिज सेक्टर में अपनी संगठित पहचान नहीं बना पा रहा था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के ठोस प्रयासों से अब वह माइनिंग कैपिटल की तरफ बढ़ने लगा है।
कारोबार के आंकड़े गिनाते हुए पांडे ने कहा कि माइनिंग के भरोसे विदर्भ में आज लगभग 50,000 करोड़ का प्रत्यक्ष टर्नओवर हो रहा है। इसमें कोयला, लाइमस्टोन, मैंगनीज और आयरन की प्रमुख भूमिका है। खनन क्षेत्र से रेलवे, ट्रांसपोर्ट, बिजली से लेकर कई छोटे-बड़े उद्योगों को काम मिल रहा है। उनके अनुसार लाखों करोड़ रुपये का टर्नओवर केवल एक सेक्टर दे रहा है। कई सीमेंट फैक्ट्रियां लाइमस्टोन के भरोसे विदर्भ में निवेश कर रही हैं।
रोजगार पर उन्होंने कहा कि खनन सेक्टर से लगभग 1 से 1.5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। अकेले वेकोलि में 35,000 और मॉयल में लगभग 10,000 लोग काम कर रहे हैं। इनके अलावा सीमेंट कंपनियों में हजारों कामगार हैं।
नई टेक्नोलॉजी के बारे में पांडे ने कहा कि विदर्भ अब उस दिशा में भी आगे बढ़ने जा रहा है। उनके मुताबिक देश में केवल विदर्भ ही ऐसा क्षेत्र है जहां 4 कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इनमें से एक प्रोजेक्ट 13,700 करोड़ का है, जिसे कोल इंडिया लिमिटेड और BPCL लगाने जा रही हैं। ईरा एनर्जी हजारों करोड़ का प्रोजेक्ट ला रही है, जिसे जमीन मिल चुकी है और काम भी शुरू हो गया है। बाकी 2 कंपनियों के भी जल्द शुरू होने की संभावना है। पांडे का कहना है कि इन प्रोजेक्ट से रोजगार और टर्नओवर बढ़ेगा और नए ऊर्जा स्रोत को बल मिलेगा।
रेयर अर्थ एलिमेंट को लेकर पांडे ने बताया कि आने वाले दिनों में विदर्भ का सबसे बड़ा एडवांटेज यही बनने जा रहा है। यहां की खदानों में बड़ी संख्या में रेयर अर्थ एलिमेंट मिल रहे हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। उनके मुताबिक पूरी दुनिया में इन तत्वों की मांग है। आरंभिक आकलन बता रहे हैं कि कई तत्व यहां बड़ी संख्या में हैं।
गड़चिरोली के बारे में पांडे ने कहा कि अर्से बाद यह इलाका हॉट केक बन गया है। वहां आयरन ओर का खनन बड़े पैमाने पर हो रहा है और गड़चिरोली ने इको सिस्टम को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सीएम देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रयासों से अब तक हजारों करोड़ का निवेश हो चुका है और एक-दो लाख करोड़ का निवेश और होने की उम्मीद है।