वरोरा स्टेशन पर रेल जनसंवाद, यात्रियों ने रखीं सुविधाओं और ट्रेनों के ठहराव की मांगें
मध्य रेलवे के नागपुर मंडल ने 22 अक्टूबर को वरोरा स्टेशन पर यात्रियों से सुझाव और समस्याएं सुनीं।
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मध्य रेलवे के नागपुर मंडल की तरफ से 22 अक्टूबर को वरोरा रेलवे स्टेशन पर रेल जनसंवाद कार्यक्रम रखा गया। मकसद था कि यात्रियों को बेहतर रेल सुविधाएं मिलें और उनकी समस्याएं और सुझाव सीधे सुने जाएं। कार्यक्रम स्टेशन के टिकट घर वाले हिस्से में हुआ, जिसमें मुख्य नोडल अधिकारी और सहायक मंडल इंजीनियर सुबोध कुमार खास तौर पर मौजूद थे। यात्रियों ने स्टेशन की सुविधाओं में सुधार समेत कई अहम मांगें रखीं।
वरोरा रेलवे स्टेशन के प्रबंधक चेतन मीना, वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर राकेश कुमार और कमर्शियल सुपरवाइजर प्रमोद देवतले भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से स्टेशन की साफ-सफाई, खाने-पीने की चीजों की उपलब्धता, पीने के पानी का इंतजाम, सफर की सहूलियत और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर सुझाव मांगे। इसके लिए यात्रियों को सुझाव फॉर्म दिए गए। कई यात्रियों ने अपने सुझाव और मांगें लिखित में दर्ज कराकर रेलवे प्रशासन का ध्यान खींचा।
जनसंवाद में वरोरा-भद्रावती रेलवे यात्री संघ के अध्यक्ष राजेंद्र मर्दाने, रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा पार्षद बंडू देऊळकर, सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष दांदळे, अतुल वानखेडे और पत्रकार चेतन लुतडे के साथ रेलवे कर्मचारी और आम नागरिक भी हाजिर थे।
पार्षद बंडू देऊळकर ने ब्रिटिश जमाने की पुलिया को चौड़ा करने और नया अंडरपास बनाने की मांग की। उनके मुताबिक वरोरा शहर की आबादी बढ़ रही है और स्टेशन के दोनों तरफ शहर फैल चुका है। इसलिए सरदार पटेल वार्ड की ब्रिटिश जमाने की रेलवे पुलिया ट्रैफिक के लिहाज से अहम रास्ता बन गई है। लेकिन पुलिया की ऊंचाई कम है और रास्ता तंग है, जिससे लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है।
देऊळकर ने मांग की कि पुलिया का जरूरी विस्तार किया जाए, नया रेलवे अंडरपास बने और ट्रैफिक के लिए एक वैकल्पिक पुल भी तैयार हो। इस बारे में उन्होंने सहायक मंडल इंजीनियर सुबोध कुमार को निवेदन सौंपा। उन्होंने उम्मीद जताई कि शहर में बढ़ते ट्रैफिक और लोगों की जरूरत को देखते हुए रेलवे प्रशासन इस मांग को गंभीरता से ले और जरूरी कदम उठाए।
यात्री संघ के अध्यक्ष राजेंद्र मर्दाने ने वरोरा स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वरोरा स्टेशन को डेढ़ सौ साल की ऐतिहासिक विरासत मिली है और कभी यह टर्मिनल के तौर पर जाना जाता था, फिर भी आज यहां कई अहम ट्रेनें नहीं रुकतीं। इस बात का उन्हें अफसोस है।
मर्दाने ने बताया कि फिलहाल वरोरा स्टेशन पर सिर्फ सात ट्रेनें रुकती हैं, जिनमें तीन रोजाना और चार साप्ताहिक गाड़ियां हैं। यात्रियों की बढ़ती तादाद के हिसाब से यह सेवा कम पड़ती है, इसलिए अहम गाड़ियों को यहां रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई दशकों से यात्री संघ यह मांग कर रहा है, लेकिन इस पर जितना ध्यान मिलना चाहिए उतना नहीं दिया जा रहा।
यात्रियों की परेशानी दूर करने के लिए मर्दाने ने जनसंवाद में कुछ और सुझाव रखे। कोरोना के दौरान बंद की गई रेल सेवाएं फिर शुरू की जाएं, प्लेटफॉर्म नंबर दो पर यात्रियों की हिफाजत के लिए शेड बने, और दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप और लिफ्ट की सुविधा दी जाए। इन सभी मांगों वाला लिखित निवेदन भी सहायक मंडल इंजीनियर को सौंपा गया।
रेल जनसंवाद के जरिए स्थानीय लोगों ने स्टेशन की बुनियादी सुविधाओं, ट्रैफिक की दिक्कतों और ट्रेनों के ठहराव से जुड़े सवाल प्रशासन के सामने रखे। मौजूद लोगों ने उम्मीद जताई कि यात्रियों के सुझावों और मांगों पर गौर करके रेलवे प्रशासन जरूरी सुधार करेगा। अब वरोरा इलाके के रेल यात्रियों की नजर इस पर है कि जनसंवाद में आई मांगों पर रेलवे प्रशासन कौन से ठोस कदम उठाता है।
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