सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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दुनिया भर में चीनी की सप्लाई पर संकट, ग्रीन पूल का अंदाज: 2026-27 में भारी कमी

ग्रीन पूल कमोडिटीज के मुताबिक ब्राज़ील, भारत और यूरोपियन यूनियन में उत्पादन घटने से कच्ची चीनी के वायदा भाव 19 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।

भारत में कुछ महीने पहले चीनी के दाम चढ़े थे, और अब इसकी सप्लाई को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। त्योहारों के मौसम से ठीक पहले यह बात पता चली है। बाज़ार का विश्लेषण करने वाली संस्था ग्रीन पूल कमोडिटीज ने अंदाज़ा लगाया है कि 2026-27 में दुनिया के बाज़ार में चीनी की सप्लाई 6.58 दशलक्ष टन कम हो सकती है। बताया जा रहा है कि इसकी मुख्य वजह मौसम और फसलों की कम पैदावार है।

इसका असर यह हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय और देश के भीतर, दोनों बाज़ारों में चीनी के दाम लगातार बढ़ते गए हैं। ब्राज़ील, भारत और यूरोपियन यूनियन में चीनी का उत्पादन काफी घटा है। सप्लाई कम होने से दाम में बड़ा उछाल आया है, और इसका बोझ अब आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।

ब्राज़ील की बात करें तो वहां एल निनो की वजह से बेमौसम और बहुत भारी बारिश हुई। नतीजा यह कि पिछले साल के मुकाबले इस साल ब्राज़ील में चीनी का उत्पादन 14 प्रतिशत गिर गया है। इस हालत को देखते हुए ग्रीन पूल ने ब्राज़ील के मध्य-दक्षिण हिस्से के लिए चीनी उत्पादन का अपना अंदाज़ा 6 लाख टन घटाकर 37.3 दशलक्ष टन कर दिया है।

यूरोपियन यूनियन में भी खराब मौसम की वजह से चीनी का उत्पादन घटने की आशंका है। गर्मियों में लंबे वक्त तक गर्मी पड़ी और सूखा रहा, जिसका बुरा असर चुकंदर की पैदावार पर हुआ। इसी वजह से ग्रीन पूल को वहां के उत्पादन का अंदाज़ा भी बदलना पड़ा। यह अंदाज़ा 228 हज़ार टन घटाकर 12.44 दशलक्ष टन किया गया है। ग्रीन पूल का मानना है कि आगे ये अंदाज़े और नीचे लाए जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो यूरोप के चीनी बाज़ार में सप्लाई कम होगी और इस इलाके की इम्पोर्ट की मांग पर भी असर पड़ सकता है।

अब भारत की हालत देखें। देश में स्टॉक सीमित है, इसलिए सरकार ने नई गन्ने की फसल की प्रोसेसिंग जल्दी शुरू करने का फैसला किया है। फिर भी भारत में सप्लाई में कमी की उम्मीद है। दिक्कत यह है कि गन्ना पूरी तरह पकने से पहले काटा गया तो 300-400 हज़ार टन चीनी उत्पादन का नुकसान हो सकता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में मानसून के आखिरी दौर में बारिश कम रही, जिससे हालात और मुश्किल हो गए हैं।

पानी की कमी के कारण खेती के लिए जलाशय के पानी के इस्तेमाल पर पाबंदियां लग सकती हैं। इससे आगे के उत्पादन पर और खतरा बढ़ सकता है। सप्लाई की इस भारी कमी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्ची चीनी के वायदा भाव 19 महीने के उच्चतम स्तर यानी 21.29 सेंट प्रति पाउंड पर पहुंच गए हैं। दामों में आगे क्या बदलाव होगा, यह ब्राज़ील, भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) में असल उत्पादन और मौसम के हालात पर निर्भर करेगा।

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