शनिवार, 7 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

बंदूक का लाइसेंस दिलाने की बात पर शिरीष गुप्ते बोले, पहला खून मेरा होगा

बंदूक का लाइसेंस दिलाने की बात पर शिरीष गुप्ते बोले, पहला खून मेरा होगा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

वंदना गुप्ते ने एक इंटरव्यू में बाला साहेब ठाकरे से जुड़ा किस्सा सुनाया। देर रात लौटने पर बाला साहेब ने बंदूक का लाइसेंस दिलाने की बात की, तो पति शिरीष गुप्ते के जवाब पर सब हंस पड़े।

अभिनेत्री वंदना गुप्ते ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बाला साहेब ठाकरे से जुड़ा एक मज़ेदार किस्सा सुनाया, जो अब खूब चर्चा में है। यह इंटरव्यू उन्होंने मुग्धा गोडबोले-रानडे को दिया था।

वंदना गुप्ते ने बताया कि उस ज़माने में नाटकों के प्रयोग होते थे और प्रयोग खत्म होते-होते रात के 12 या 1 बज जाते थे। कभी-कभी घर पहुंचते-पहुंचते डेढ़ या दो बज जाते थे। इसके बावजूद उन्हें उस वक्त कभी डर नहीं लगा। रात में अकेले आना-जाना उनके लिए टेंशन की बात नहीं थी और वे बेफिक्र होकर घूमती थीं। आज सोचती हैं तो लगता है कि उस दौर में लोग ही बेफिक्र थे।

गुप्ते परिवार का बाला साहेब ठाकरे से बहुत करीबी रिश्ता था। बाला साहेब प्यार से वंदना गुप्ते को "भूत" कहकर बुलाते थे। वे अक्सर शिरीष गुप्ते से पूछते थे, "क्यों रे, भूत कहां है? घर आ गई क्या?"

एक बार वंदना देर रात घर लौट रही थीं और यह बात बाला साहेब के कानों तक पहुंच गई। उन्हें फिक्र हुई कि एक महिला इतनी रात गए आती-जाती है, कहीं उसे कोई परेशानी न हो। इसी वजह से उन्होंने शिरीष गुप्ते से कहा, "शिरीष, वंदना इतनी देर से आती-जाती हैं। उनके लिए बंदूक का लाइसेंस निकलवा दूं क्या? अपनी हिफाज़त के लिए ठीक रहेगा।"

बाला साहेब की यह बात सुनकर शिरीष गुप्ते चुप नहीं रहे। उन्होंने फौरन मज़ाकिया अंदाज़ में जवाब दिया, "नहीं नहीं साहब, बिल्कुल नहीं। वरना पहला खून मेरा ही होगा!"

यह सुनकर वंदना गुप्ते को भी हंसी नहीं रुकी। इंटरव्यू में यह किस्सा सुनाते हुए भी वे खूब खिलखिलाकर हंसीं। पति-पत्नी के बीच की यह मस्ती उनकी बातों से साफ झलक रही थी।

वंदना गुप्ते कई साल से मराठी दर्शकों का मनोरंजन करती आ रही हैं। फिल्मों में Baipan Bhari Deva में उन्होंने कमाल का काम किया। डबल सीट, टाइमपास और बकेट लिस्ट में उनके किरदार लोगों को याद रह गए। टीवी पर Sukhachya Sarini He Mann Baware में उनकी भूमिका खूब पसंद की गई थी और लोग आज भी उसे याद करते हैं।

नाटक तो उनकी जान हैं। Charchaughi, Char Divas Premache, Sundar Mi Honar और Shhh... Kuthe Bolayche Nahi जैसे कई नाटकों को उन्होंने यादगार बनाया। मंच पर उनके आते ही लोग हंसते थे, रोते थे और तालियां बजाते थे।

वंदना गुप्ते मशहूर गायिका माणिक वर्मा की बेटी हैं, यानी कला उन्हें घर में ही मिली। 1973 में उनकी शादी एडवोकेट शिरीष गुप्ते से हुई। तब से आज तक दोनों की जोड़ी बहुत मज़बूत है। बाला साहेब से जुड़ा यह किस्सा अब हर तरफ सुनाया जा रहा है और लोगों को पसंद आ रहा है, क्योंकि इसमें प्यार भी है, फिक्र भी और मज़ाक भी।

#नागपुर#PT24#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे