गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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वाई नगरपरिषद की सभा में हंगामा, विकास के काम और पानी की सप्लाई पर भिड़े सदस्य

शहर PT24 शहर डेस्क

वाई नगरपरिषद की विशेष सभा में कामों की क्वालिटी और कम पानी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई। आखिर में दिवाली पर हर अधिकारी, कर्मचारी और कामगार को दस हजार रुपये देने का फैसला हुआ।

वाई नगरपरिषद की विशेष सभा में शहर के विकास कामों की क्वालिटी और कम पानी की सप्लाई पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। विपक्ष के पार्षद भारत खामकर ने मौजूदा कामों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। नगराध्यक्ष अनिल सावंत ने जवाब में कहा कि काम अच्छे दर्जे के हो रहे हैं। सभा में परिषद पर करीब 40 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठा। आखिर में सभा ने दिवाली के मौके पर अधिकारियों, कर्मचारियों और मज़दूरों को दस हजार रुपये प्रति व्यक्ति अनुग्रह राशि देने को मंजूरी दे दी।

यह विशेष सभा गुरुवार सुबह ग्यारह बजे नगरपरिषद के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागार में नगराध्यक्ष अनिल सावंत की अध्यक्षता में हुई। उपनगराध्यक्ष घनश्याम चक्के, विषय समितियों के सभापति और सभी पार्षद मौजूद थे।

सभा के सामने पाँच विषय रखे गए थे। विकास कामों की गुणवत्ता, ठोस कचरा प्रबंधन, पानी की सप्लाई और अनुग्रह राशि के मुद्दों पर सदस्यों ने अपनी बात रखी।

भारत खामकर ने आरोप लगाया कि शहर में चल रहे विकास कामों में उम्मीद के मुताबिक क्वालिटी नहीं है। उन्होंने इन कामों की तुलना प्रशासक के कार्यकाल में हुए कामों से करते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने यह भी कहा कि शहर के लोगों को बहुत कम समय पानी मिल रहा है और पानी सप्लाई विभाग को फौरन इंतजाम करने चाहिए।

इस पर नगराध्यक्ष सावंत ने कहा कि अभी के विकास काम अच्छे दर्जे के हो रहे हैं। उनकी राय थी कि इनकी तुलना प्रशासक के कार्यकाल के कामों से करना ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्तर पर फाइलों की देरी की वजह से कामों में देर हो रही है। सावंत ने कहा कि प्रशासन के अच्छे काम की तारीफ होनी चाहिए, लेकिन ऐसी तुलना करते वक्त उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या वाई के लोगों ने उन्हें चुनकर गलती की। उनका कहना था कि नगरपरिषद का कामकाज किफायत से चलाया जा रहा है और सभी सदस्य इसमें साथ दें।

पानी की सप्लाई के टेंडर को लेकर पार्षद अजित शिंदे ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूछा कि दो महीने पहले प्रस्ताव पास होने के बावजूद टेंडर की प्रक्रिया क्यों नहीं चलाई गई। उन्होंने यह सवाल भी किया कि क्या संबंधित ठेकेदार को बचाया जा रहा है। पार्षद नीलिमा खरात ने खामकर की बात का समर्थन किया और पीने के पानी की समस्या फौरन सुलझाने की मांग की।

कर्मचारियों की अनुग्रह राशि पर सभा में लंबी चर्चा चली। नगराध्यक्ष सावंत ने नगरपरिषद पर करीब 40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को एक साथ अनुग्रह राशि देने का विरोध किया। उनका कहना था कि अनुग्रह राशि उन चौथी श्रेणी के कर्मचारियों को मिलनी चाहिए जो सड़क पर उतरकर काम करते हैं।

सावंत ने यह मुद्दा भी उठाया कि चौथी श्रेणी के कर्मचारियों के लिए सप्ताह में छह दिन काम का नियम है, लेकिन असल में पाँच ही दिन काम होता है। उनके मुताबिक यह पिछले छह साल से चल रहा है और इससे नगरपरिषद और सरकार के पैसे की बर्बादी हो रही है।

मुख्य अधिकारी संजीवनी दलवी ने बताया कि नगरपरिषद में कुल 88 अधिकारी, कर्मचारी और मज़दूर हैं। उन्होंने साफ किया कि अनुग्रह राशि सिर्फ उसी कर्मचारी को दी जाती है जिसने कम से कम आठ महीने की सेवा पूरी की हो। अजित शिंदे ने मांग की कि बिना किसी भेदभाव के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और मज़दूरों को अनुग्रह राशि दी जाए। चर्चा के बाद हर एक को दस हजार रुपये अनुग्रह राशि देने का फैसला मंजूर किया गया।

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