बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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22:01 IST

त्योहार सिर पर, पर तीन महीने से दुकानों में पड़ा है गरीबों का राशन

गोंडपिपरी में POS मशीन और NIC की प्रक्रिया के नाम पर अक्टूबर का अनाज जुलाई से बंटा नहीं है। दशहरा-दिवाली से पहले लोग परेशान हैं।

त्योहार सिर पर, पर तीन महीने से दुकानों में पड़ा है गरीबों का राशन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गोंडपिपरी में त्योहारों के दिन चल रहे हैं, लेकिन सस्ते राशन का वितरण तकनीकी अड़चनों में अटका हुआ है। दशहरा और दिवाली सिर पर हैं और ज़रूरतमंद व गरीब परिवारों को अपने हक के अनाज के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि POS मशीन बंद है, और अक्टूबर महीने का अनाज जुलाई से ही सस्ते राशन दुकानदारों के पास पड़ा है।

तीन महीने से ज़्यादा वक्त बीत चुका है, फिर भी अनाज लाभार्थियों तक नहीं पहुंचा। इससे संबंधित व्यवस्था के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं।

सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के ज़रिए सरकार गरीब और ज़रूरतमंद परिवारों को सस्ते दाम पर या नियम के मुताबिक मुफ्त अनाज देती है। लेकिन अनाज दुकान में मौजूद होने के बावजूद तकनीकी प्रक्रिया की रुकावटों की वजह से लोगों को न मिले, तो इस व्यवस्था का फायदा क्या, यह सवाल उठाया जा रहा है।

अक्टूबर के अनाज की प्रक्रिया जुलाई से लंबित बताई जा रही है। दुकान में अनाज होने पर भी उसे बांटा नहीं जा सकता, इसलिए राशन कार्ड धारकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

वितरण रुकने की वजह POS मशीन का बंद होना बताई जा रही है। साथ ही कहा जा रहा है कि NIC तंत्र की ओर से इस अनाज की एंट्री या ज़रूरी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई, इसलिए वितरण अटका है।

सवाल यह भी है कि तकनीकी अड़चनें दूर करने की ज़िम्मेदारी आखिर किसकी है और इस प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है। नागरिक पूछ रहे हैं कि सरकारी व्यवस्था की तकनीकी दिक्कतों का बोझ आम लाभार्थी क्यों उठाए।

दशहरा और दिवाली खुशी और उत्साह के दिन हैं, परिवार के साथ त्योहार मनाने के दिन हैं। पर रोज़ की रोटी के लिए जूझते परिवारों के लिए राशन के अनाज की खास अहमियत होती है। कई परिवार घर के अनाज का खर्च चलाने के लिए इसी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में त्योहार के वक्त ही वितरण अटका रहा तो गरीब परिवारों का बजट बिगड़ने की आशंका है। बाज़ार से महंगे दाम पर अनाज खरीदना हर परिवार के बस की बात नहीं होती। इसलिए अनाज मौजूद होते हुए भी सिर्फ तकनीकी वजहों से न मिलने पर लाभार्थियों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं।

सूखे का संकट, बढ़ता घरखर्च और रोज़ की ज़रूरतें पूरी करने की जद्दोजहद, आम लोग इन सब से जूझ रहे हैं। ऐसे वक्त सरकार की अनाज वितरण व्यवस्था से समय पर मदद की उम्मीद रहती है। तकनीकी दिक्कत के नाम पर देरी हो, तो सबसे ज़्यादा मार आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके पर पड़ती है। गरीब की थाली का सवाल सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया का नहीं है, वह उनके रोज़ के जीने से जुड़ा है। इसलिए प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

मांग उठ रही है कि संबंधित आपूर्ति विभाग, तहसील प्रशासन और तकनीकी तंत्र मिलकर काम करें। POS मशीन की अड़चनें क्या हैं, NIC स्तर पर कौन सी प्रक्रिया लंबित है और अनाज वितरण पहले जैसा होने में कितना वक्त लगेगा, इस पर साफ जानकारी मिलनी चाहिए।

प्रशासन से ये कदम उठाने की मांग की जा रही है: POS मशीन की तकनीकी दिक्कतें तुरंत दूर की जाएं, NIC की ओर से लंबित प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पीछा किया जाए, राशन दुकानों में पड़ा अनाज नियम के मुताबिक फौरन बांटना शुरू हो, लाभार्थियों को वितरण का तय समय-सारिणी साफ बताई जाए, और देरी के कारणों की जांच कर ज़िम्मेदारी तय की जाए।

सरकार की यह व्यवस्था गरीबों को वक्त पर अनाज पहुंचाने के लिए है। अनाज दुकान में पड़ा हो और तकनीकी अड़चन की वजह से न बंटे, तो संबंधित तंत्र की कार्यक्षमता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब सवाल यह है कि प्रशासन अब तो जागेगा या तकनीकी रुकावटों के इंतज़ार में लाभार्थियों की परेशानी यूं ही चलती रहेगी।

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