तोतलाडोह डैम में अक्टूबर में ही सिर्फ 49.82 फीसदी पानी, पिछले साल 99.92 फीसदी था
नागपुर शहर और जिले के उद्योगों को पानी देने वाले तोतलाडोह डैम में अक्टूबर में ही मई जैसी हालत है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर शहर और जिले के कई उद्योगों और कारखानों को जिस तोतलाडोह डैम से पानी मिलता है, उसमें अक्टूबर के महीने में ही मई जैसी हालत हो गई है। पूरे राज्य पर सूखे का साया है और अब उसकी तपिश नागपुर जिले तक पहुंच चुकी है।
आंकड़े साफ बताते हैं कि हालात कितने बदले हैं। पिछले साल अक्टूबर के दूसरे हफ्ते के आखिर में तोतलाडोह डैम में पूरे 99.92 फीसदी पानी का स्टॉक था। इस साल उसी वक्त डैम में सिर्फ 49.82 फीसदी पानी बचा है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर पेंच नदी पर बना यह डैम नागपुर शहर की प्यास तो बुझाता ही है, उद्योगों की जरूरत और किसानों की सिंचाई का पानी भी इसी से दिया जाता है। लेकिन इस बार अल नीनो के असर से नागपुर जिले में 35 फीसदी कम बारिश हुई है। सिंचाई यानी जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इसका उलटा असर डैम के पानी के भंडार पर दिख रहा है।
आम तौर पर जो नजारा मई के आखिर में दिखता था, वह इस बार अक्टूबर में ही सामने है। हर साल डैम के पानी के बीच रेत के छोटे टीले अप्रैल या मई में पानी घटने पर दिखाई देते थे। इस साल उन टीलों ने अक्टूबर में ही सिर उठा लिया है।
चिंता की एक और वजह भाप बनकर उड़ता पानी है। अक्टूबर की तेज गर्मी की वजह से हर 7 से 8 दिन में उतने पानी का वाष्पीकरण हो रहा है, जितना नागपुर शहर को 2 दिन चल सके। इसी वजह से पानी का भंडार तेजी से कम हो रहा है।
इसका मतलब यह है कि नागपुर के लोगों को अब पानी का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना पड़ेगा और पानी की फिजूलखर्ची रोकनी ही होगी। साथ ही प्रशासन को भी बचे हुए 49 फीसदी पानी की बारीकी से योजना बनानी होगी। पेंच के घने जंगल में बसे तोतलाडोह डैम पर जाकर पानी के भंडार और पानी सप्लाई की हालत देखी गई, तो सूखे की भीषण तपिश साफ नजर आई।
यवतमाल जिले की तस्वीर भी कुछ अलग नहीं है। वहां अल नीनो के असर से इस साल बारिश में लंबा अंतराल पड़ा है और जिले पर सूखे का संकट आ गया है। बड़ी, मध्यम और लघु परियोजनाओं में कुल 76 फीसदी पानी का भंडार है। पानी की किल्लत से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन समिति ने 16 अक्टूबर से 10 फीसदी कटौती का फैसला लिया है।
कपास, अरहर और चारा फसलों के लिए पानी देने की किसानों की मांग को देखते हुए पानी आरक्षण समिति ने भी फैसला किया है। इसके मुताबिक बेंबला और अरुणावती जैसी बड़ी परियोजनाओं से आठ दिन में, मध्यम परियोजनाओं से दो दिन में और लघु परियोजनाओं से जरूरत के हिसाब से तुरंत पानी छोड़ा जाएगा।
यवतमाल जिले में 3 बड़ी परियोजनाएं हैं, जिनमें आज की तारीख में 67 फीसदी पानी का भंडार है। 7 मध्यम परियोजनाओं में 82 फीसदी और 63 लघु परियोजनाओं में 84 फीसदी पानी है। डेढ़ महीने से बारिश गायब है और तापमान बढ़ रहा है, जिससे वाष्पीकरण होकर पानी के भंडार में भारी कमी आ रही है। इसलिए इस बार गर्मी से पहले ही पानी की किल्लत की आशंका है। ऐसे में सिंचाई विभाग ने सरकार के आदेश के मुताबिक पानी आरक्षण की योजना बनाना शुरू कर दिया है।