थोक महंगाई के डर से बाजार फिसला, सेंसेक्स 251 अंक टूटकर 72,781 पर बंद
थोक महंगाई बढ़ने की चिंता में बुधवार को शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ।
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देश में थोक महंगाई की बढ़ती दर का असर बुधवार (14 अक्टूबर) को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। पूरे दिन उतार-चढ़ाव चलता रहा और आखिर में मुंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 251 अंक गिरकर 72,781 अंक पर बंद हुआ। राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी 99 अंक की गिरावट के साथ 22,622 अंक पर टिका।
बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, फार्मा और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। दूसरी तरफ आईटी क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।
सितंबर महीने में थोक कीमत सूचकांक पर आधारित महंगाई दर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई। अगस्त में यह दर 9.92 प्रतिशत थी। ईंधन, ऊर्जा, खाने-पीने की चीजों और बने हुए सामान की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ा है। इन आंकड़ों का असर बाजार के निवेशकों के मूड पर पड़ा।
मंगलवार की जोरदार तेजी के बाद बुधवार को बाजार की शुरुआत मिली-जुली रही। सेंसेक्स 73,050 अंक पर खुला और निफ्टी ने 22,716 अंक के आसपास कारोबार शुरू किया। शुरुआती सत्र में आईटी शेयरों की तेजी से बाजार कुछ हद तक सकारात्मक रहा। लेकिन दोपहर के बाद वित्तीय और दूसरे अहम क्षेत्रों में बिकवाली बढ़ने से प्रमुख सूचकांक फिसल गए। दोपहर करीब डेढ़ बजे सेंसेक्स 72,654 अंक तक नीचे आ गया था और निफ्टी भी 22,600 अंक के नीचे चला गया था। इसके बाद बाजार ने कुछ संभलने की कोशिश की।
गिरावट के बीच आईटी क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयर मजबूत रहे। इंफोसिस का शेयर करीब 2.51 प्रतिशत चढ़ा। टेक महिंद्रा में 2.20 प्रतिशत और टीसीएस में 1.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचसीएल टेक जैसी कंपनियों के शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया।
दूसरी ओर बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और इंडिगो के शेयर करीब 1.50 से 2.55 प्रतिशत तक गिरे। इटर्नल, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, लार्सन एंड टुब्रो और टाइटन के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव दिखा।
बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना रहा। बैंक निफ्टी में करीब 0.30 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सूचकांक 1.11 प्रतिशत नीचे आया। मेटल, फार्मा, निजी बैंक, रियल्टी, हेल्थकेयर और सीमेंट क्षेत्र के सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए। आईटी, एफएमसीजी, तेल और गैस, मीडिया, केमिकल्स और सरकारी बैंकों के कुछ सूचकांकों में सकारात्मक कारोबार रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल करीब 107 डॉलर तक पहुंच गई है। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष से तेल आपूर्ति पर असर पड़ने का डर जताया जा रहा है। इससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। भारत बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का असर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली जारी है। मंगलवार को उन्होंने करीब 1,305 करोड़ रुपये के शेयर शुद्ध रूप से बेचे। यह लगातार 13वां कारोबारी दिन था। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 2,439 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे विदेशी बिकवाली का असर कुछ कम हुआ।
आगे बाजार की दिशा कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों, महंगाई की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर कर सकती है। खासकर आईटी, बैंकिंग, वाहन और वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों की नजर है। बाजार की अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों के लिए फैसला लेते समय कंपनियों का प्रदर्शन, जोखिम और बाजार के हालात देखना अहम होगा।