मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:00 IST

शेयर बाजार में लगातार सातवें हफ्ते गिरावट, निवेशक परेशान

कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल के बीच सेंसेक्स-निफ्टी में उतार-चढ़ाव जारी, FII लगातार बिकवाली कर रहे तो DII खरीदारी से बाजार को सहारा दे रहे हैं।

शेयर बाजार में लगातार सातवें हफ्ते गिरावट, निवेशक परेशान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

शेअर बाजार में पिछले सात हफ्तों से गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर चिंता बनी हुई है कि आखिर बाजार में हो क्या रहा है जिसकी वजह से लगातार लाल निशान दिख रहा है। ग्लोबल स्तर पर बनी चिंता का असर सीधे भारतीय शेयर बाजार पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इजाफा और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) की लगातार बिकवाली की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 0.88 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है।

साप्ताहिक आधार पर देखें तो निफ्टी 0.88 फीसदी कमजोर पड़ा। हालांकि हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन निफ्टी 0.34 फीसदी की बढ़त के साथ 23,140 पर बंद हुआ। शुक्रवार को सेंसेक्स भी 315 अंक यानी 0.43 फीसदी उछलकर 73,895 पर बंद हुआ, लेकिन पूरे हफ्ते के हिसाब से यह 0.54 फीसदी नीचे रहा। यानी पूरे हफ्ते बाजार में जबरदस्त उठापटक चलती रही।

गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 1.6 फीसदी से ज्यादा गिर गए थे, वहीं शुक्रवार को कुछ चुनिंदा शेयरों में सस्ते दामों पर खरीदारी होने से मामूली रिकवरी देखी गई। बाजार के जानकारों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत पूरे हफ्ते 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रही, जबकि WTI क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता रहा। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल सप्लाई को लेकर बनी चिंता की वजह से तेल की कीमतों को सहारा मिला। हालांकि हफ्ते के आखिर में तेल की कीमतें थोड़ी नरम पड़ीं, जिससे इंपोर्ट बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों के खर्च को लेकर बना दबाव कुछ कम हुआ।

इसी दौरान अमेरिका के बॉन्ड बाजार ने भी निवेशकों की परेशानी बढ़ा दी। हफ्ते भर अमेरिका का 10 साल का ट्रेजरी यील्ड 5.10 फीसदी के ऊपर बना रहा। जानकारों का कहना है कि यील्ड में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि ग्लोबल लेवल पर फाइनेंशियल हालात सख्त हो रहे हैं, जिससे इमर्जिंग मार्केट में लगाया गया पैसा कम आकर्षक लगने लगता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी बाजार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक FII लगातार छठे हफ्ते नेट सेलर रहे और उन्होंने इस हफ्ते 11,490 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।

इसके उलट देशी संस्थागत निवेशकों यानी DII ने अपनी खरीदारी जारी रखी और 16,398 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी करके बाजार की गिरावट को कुछ हद तक थाम लिया। सितंबर महीने में अब तक FII कुल 18,531 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं, जबकि DII ने 52,617 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की है। इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के आखिर वाले लेवल से करीब 3.9 फीसदी नीचे बना हुआ है।

बाजार की नजर पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम पर भी टिकी हुई है। खबरों के मुताबिक ईरान ने अमेरिका को एक नया सात दिन का प्रस्ताव दिया है, जिसमें पूरी तरह से युद्धविराम के बदले नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग रखी गई है। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर इस दिशा में बात आगे बढ़ती है तो तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम की वजह से लगा प्रीमियम कम हो सकता है।

टेक्निकल एनालिस्ट बताते हैं कि निफ्टी के लिए 23,000 का लेवल तुरंत का सपोर्ट जोन है, जबकि 23,200 का लेवल सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस है। आगे बाजार की चाल काफी हद तक विदेशी निवेश के फ्लो, कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल संकेतों पर निर्भर करेगी। जानकारों के मुताबिक अगर FII की बिकवाली जारी रही और ग्लोबल हालात मुश्किल बने रहे तो बाजार में उथल-पुथल कायम रह सकती है, हालांकि DII की लगातार खरीदारी फिलहाल बाजार को बड़े नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। अगले हफ्ते निवेशकों की नजर खासतौर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतों, अमेरिका-ईरान बातचीत में होने वाली प्रगति और अमेरिका की दूसरी तिमाही (Q2) की जीडीपी के आंकड़ों पर रहेगी, जो बाजार की आगे की दिशा तय करने में अहम रोल निभा सकते हैं।

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