गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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सूखे से जूझते पशुपालकों को मोहरली में मिलेगा मुफ्त चारा, कलेक्टर वसुमना पंत ने शुरू किया केंद्र

सूखे से जूझते पशुपालकों को मोहरली में मिलेगा मुफ्त चारा, कलेक्टर वसुमना पंत ने शुरू किया केंद्र तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

चंद्रपुर की जिलाधिकारी वसुमना पंत ने ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के मोहरली में मुफ्त चारा वितरण केंद्र शुरू किया। फायर लाइन का घास जलाने की जगह पशुपालकों को दिया जाएगा।

चंद्रपुर जिले के सूखा प्रभावित इलाकों में पशुपालकों और किसानों के जानवरों को चारा मिलता रहे, और इसके साथ इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव भी कम हो, इसी मकसद से जिलाधिकारी वसुमना पंत (भा.प्र.से.) ने एक नई पहल की है। उनकी सोच से जिले में मुफ्त चारा वितरण केंद्र खोलने का काम हाथ में लिया गया है। इसकी शुरुआत ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के मोहरली बफर वन परिक्षेत्र कार्यालय से हुई।

वसुमना पंत चंद्रपुर जिले की पहली महिला जिलाधिकारी हैं। मोहरली के चारा वितरण केंद्र का उद्घाटन उन्हीं के हाथों हुआ और माहौल काफी उत्साह भरा रहा। कार्यक्रम की शुरुआत में आदिवासी गोंडी नृत्य के साथ मेहमानों का पारंपरिक स्वागत किया गया। फिर तस्वीर पर माला चढ़ाई गई, फीता काटा गया और जिलाधिकारी ने खुद चारा बांटकर केंद्र चालू किया।

कार्यक्रम में ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के बफर उपसंचालक विशाल माली, सहायक वन संरक्षक (बफर) संकेत वाटोरे और मोहरली के वन परिक्षेत्र अधिकारी संतोष थिपे मौजूद थे। इनके साथ वन विभाग के दूसरे अधिकारी और कर्मचारी भी आए थे।

मोहरली, जुनोना, भामडेली, सितारामपेठ, कोंडेगाव, मुधोली, टेकाडी, अडेगाव, आगरझरी और देवाडा के सरपंच, पुलिस पाटील, इको विकास समिति के अध्यक्ष और सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सितारामपेठ की मातृशक्ति महिलाएं, पर्यटन व्यवस्थापक, पर्यटक गाइड और PRT के सदस्य भी वहां थे।

इस पहल की खास बात यह है कि वन क्षेत्र में फायर लाइन पर हर साल जो घास उगती है, उसे जलाकर खत्म नहीं किया जाएगा। उसे इकट्ठा करके स्थानीय पशुपालकों और किसानों को मुफ्त दिया जाएगा, ऐसी योजना बनाई गई है।

जिलाधिकारी वसुमना पंत की सोच है कि जिले के सभी वन क्षेत्रों में इसी तरह के चारा वितरण केंद्र खड़े किए जाएं। इससे सूखा प्रभावित इलाकों के पशुपालकों को अपने पालतू जानवरों के लिए चारा मिलेगा और चारे की कमी से जो दिक्कत खड़ी होती है, वह कम होगी।

इस पहल का एक बड़ा मकसद यह भी है कि चारे की तलाश में पालतू जानवर जंगल में कम जाएं। जानवर जंगल में कम जाएंगे तो जंगली जानवरों से उनका सामना, मवेशियों का नुकसान और इंसानी जान जाने का खतरा टालने में मदद मिल सकती है। इसलिए यह केंद्र सिर्फ पशुपालकों को राहत देने वाला नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीवों के साथ रहने की नजर से भी अहम माना जा रहा है।

उद्घाटन के बाद वसुमना पंत ने मोहरली बफर वन परिक्षेत्र कार्यालय का मुआयना किया। उन्होंने वन विभाग की तरफ से चल रही अलग-अलग योजनाओं और दफ्तर के कामकाज की जानकारी ली। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के काम की उन्होंने तारीफ भी की।

सूखा प्रभावित पशुपालकों को मुफ्त चारा देना, वन क्षेत्र की घास का सही इस्तेमाल करना और जंगल पर पालतू जानवरों का दबाव घटाना, ये तीनों बातें इस पहल से जुड़ती हैं। उम्मीद है कि यह चंद्रपुर जिले के लिए एक अहम कदम साबित होगा। मोहरली में शुरू हुआ यह मॉडल अगर जिले के बाकी वन क्षेत्रों में भी लागू हुआ, तो गांव के पशुपालकों को बड़ी राहत मिल सकती है।

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