सूखे की मार के बीच अधिवेशन की तैयारी पर 42 करोड़ और, PWD का खर्च 129 करोड़ पहुंचा
नागपुर में होने वाले विधिमंडल के शीतकालीन अधिवेशन की तैयारी का खर्च बढ़ाया गया है, जबकि राज्य सरकार सूखे के चलते खर्च में कटौती के निर्देश दे चुकी है।
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राज्य में सूखे की मार हर दिन बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में ज्यादातर इलाकों में हालात और बिगड़ने का डर जताया जा रहा है। इसके बावजूद राज्य सरकार की तरफ से कोई ठोस उपाय लागू नहीं किए जा रहे, ऐसा बताया जा रहा है। साथ ही प्रशासन के अलग-अलग विभागों को खर्च में कटौती करने के निर्देश भी दिए जा रहे हैं।
इसी बीच नागपुर में होने वाले विधानमंडल के शीतकालीन अधिवेशन (Winter Session 2026) की तैयारी का खर्च अचानक 42 करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया है। जानकारी के मुताबिक यह बढ़ोतरी जरूरी अतिरिक्त कामों के लिए की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद अधिवेशन की तैयारी पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) का कुल खर्च 129 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी मुद्दे पर अब राजनीति गरमाने की संभावना है।
मिली जानकारी के मुताबिक अगस्त महीने में सार्वजनिक निर्माण विभाग ने अधिवेशन की तैयारी के खर्च का शुरुआती अंदाज तैयार किया था। वह अंदाज 145 करोड़ रुपये का था। बाद में सूखे की तीव्रता बढ़ने पर सभी विभागों को खर्च घटाने के निर्देश दिए गए। उसके बाद विभाग का संशोधित खर्च घटाकर 87 करोड़ रुपये कर दिया गया था।
लेकिन दो दिन पहले सार्वजनिक निर्माण विभाग ने अतिरिक्त जरूरी कामों के लिए 42 करोड़ रुपये के खर्च को फिर से मंजूरी दे दी। इसी वजह से अधिवेशन की तैयारी पर विभाग का खर्च अब 129 करोड़ रुपये तक चला गया है।
नागपुर में अधिवेशन के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग की तरफ से अलग-अलग सरकारी इमारतों की मरम्मत और रंगाई-पुताई पर खर्च किया जाता है। रवि भवन, नाग भवन, विधान भवन और दूसरी प्रशासनिक इमारतों में जरूरी सुविधाएं तैयार करने पर भी पैसा लगता है। इसके अलावा सिविल लाइन्स इलाके की सड़कों का काम भी किया जा रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि राज्य में सूखे को देखते हुए क्या यह खर्च करना सचमुच जरूरी है।
सूखे की पृष्ठभूमि में सरकार ने खर्च कटौती के कुछ फैसले लिए थे। राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों से एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री सहायता निधि में जमा करने की अपील की गई। राज्य सरकार ने सरकारी खर्च में 20 फीसदी कटौती का फैसला लिया। सभी विभागों को गैर-जरूरी खर्च से बचने के निर्देश भी दिए गए।
यानी एक तरफ सूखे को देखते हुए सरकार के खर्च कटौती के निर्देश हैं, तो दूसरी तरफ अधिवेशन के खर्च में अतिरिक्त कामों के नाम पर 42 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है। इसी से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सार्वजनिक निर्माण विभाग पर खर्च कटौती के नियम लागू नहीं होते।
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