नागपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के लिए वायु सेना की 27 एकड़ जमीन पर बनी सहमति
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बैठक के बाद बताया कि वायु सेना जमीन राज्य सरकार को देने पर राजी है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर के डॉ. बाबासाहब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के रास्ते की सबसे बड़ी अड़चन अब दूर हो गई है। जमीन के हस्तांतरण को लेकर राज्य सरकार और भारतीय वायु सेना के बीच सहमति बन गई है। इसके बाद एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और नए टर्मिनल के निर्माण काम को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई बैठक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नागपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के लिए भारतीय वायु सेना की 27 एकड़ जमीन की जरूरत थी। वायु सेना ने जरूरी जमीन तुरंत राज्य सरकार को सौंपने पर हामी भरी है। फडणवीस के मुताबिक रक्षा मंत्री ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाया और जरूरी सहयोग का भरोसा दिया है।
बैठक में तय हुआ कि 9 हेक्टेयर जमीन एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन के निर्माण के लिए जल्द उपलब्ध कराई जाएगी और इसके लिए जरूरी निर्माण अनुमति भी दी जाएगी। बाकी 18 हेक्टेयर जमीन जून 2028 तक मिल जाएगी।
वायु सेना को आवंटित जमीन के एक हिस्से पर अतिक्रमण था। इस सहमति के बाद उसे अगले 7 से 10 दिनों के भीतर पूरी तरह खाली कराने की प्रतिबद्धता जताई गई है। जमीन खाली होते ही पूरा भूखंड भारतीय वायु सेना के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार और जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड नए एयरफोर्स परिसर तक जरूरी सड़क और दूसरी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगे। जब तक वायु सेना की नई सुविधाओं का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक एयरफोर्स के रोजमर्रा के संचालन में भी जरूरी मदद दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सहमति से नागपुर एयरपोर्ट के फेज-1 का विकास काम जून 2029 से पहले पूरा करने में मदद मिलेगी। बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े। मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेशचंद्र भी मौजूद थे। फडणवीस के अनुसार एयरपोर्ट के तकनीकी क्षेत्र में भारी मशीनरी की आवाजाही के लिए सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल गई है, जिसके लिए अलग मानक कार्यप्रणाली तैयार की जाएगी।
जीएमआर नागपुर की तरफ से बताया गया कि जैसे ही वायु सेना को अपनी पूरी जमीन का कब्जा मिलेगा, वे बजट आवंटित करके वहां निर्माण काम शुरू कर देंगे। इसके बाद जून 2028 से वायु सेना अपनी मौजूदा जमीन चरणबद्ध तरीके से नए एयरपोर्ट टर्मिनल के विस्तार के लिए सौंपना शुरू करेगी। इस फैसले से राज्य सरकार और वायु सेना के बीच का लंबित मुद्दा सुलझ गया है।
वायु सेना को अपनी जमीन मिलने के बाद वह नया ढांचा तैयार करेगी। इससे एयरपोर्ट अथॉरिटी को नया और भव्य टर्मिनल बनाने के लिए जरूरी जमीन बिना रुकावट के मिल जाएगी।