स्टेलँटिस भारत में 4,000 करोड़ रुपये लगाएगी, जीप और सिट्रॉएन की 12 नई गाड़ियां आएंगी
स्टेलँटिस ने फास्टलेन 2030 के तहत भारत में जीप और सिट्रॉएन की 12 गाड़ियों और अंदाजन 4,000 करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा की है।
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स्टेलँटिस ने अक्टूबर 2026 में भारत में अपने अगले दौर की ग्रोथ का ऐलान किया। कंपनी के मुताबिक यह कारोबार की नींव रखने से आगे बढ़कर उसे फैलाने की तरफ बदलाव है। फास्टलेन 2030 के तहत जीप(R) और सिट्रॉएन अगले तीन साल में 12 प्रोडक्ट लाएंगे। इनमें सात बिल्कुल नए प्रोडक्ट होंगे और पांच बड़े अपग्रेड।
मकसद साफ है कि भारत की सड़कों पर जीप और सिट्रॉएन की गाड़ियां काफी ज्यादा दिखें। इन लॉन्च में बी, सी और डी एसयूवी सेगमेंट के प्रोडक्ट, एक एमपीवी, ए-सेगमेंट की कार और प्रीमियम पिकअप शामिल होंगे। इस नए रोडमैप का पहला प्रोडक्ट 2027 की दूसरी तिमाही तक लॉन्च करने की योजना है।
इस मुहिम को अगले 3 साल में अंदाजन 4,000 करोड़ रुपये (अंदाजन 4,00 मिलियन यूरो) के नए निवेश का सहारा मिलेगा। इससे 2030 तक भारत में स्टेलँटिस का कुल निवेश 11,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अंदाजन 15,000 करोड़ रुपये हो जाएगा। रोडमैप में 5 जीप और 7 सिट्रॉएन प्रोडक्ट के लॉन्च हैं। दोनों ब्रांड अलग रहेंगे, लेकिन एक-दूसरे के पूरक की भूमिका निभाएंगे।
यह घोषणा ऐसे वक्त हुई है जब कारोबार में तेजी है। कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में स्टेलँटिस इंडिया के कारोबार में 35 प्रतिशत की बढ़त हुई। वहीं पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2026 की दूसरी तिमाही में सिट्रॉएन की रिटेल बिक्री 68 प्रतिशत बढ़ी।
स्टेलँटिस एशिया-पैसिफिक रीजन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तियांशू शिन ने कहा, "स्टेलँटिस के लिए भारत की दोहरी भूमिका है। यह एक अहम बाजार है जहां हमें फैलना है, और पूरे इलाके व बड़े ग्रुप के लिए लगातार बढ़ता हुआ अहम कैपेबिलिटी बेस भी है।" उन्होंने कहा कि भारत उनके लिए लंबे वक्त की प्रतिबद्धता है, सिर्फ बिक्री करने का बाजार नहीं। उनके मुताबिक फास्टलेन 2030 के तहत रीजन-लेड मॉडल भारत की टीम को फैसले लेने के ज्यादा अधिकार देता है।
स्टेलँटिस इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश हजेला ने कहा, "भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता इस बात से परखी जाएगी कि हम सड़क पर कैसा प्रोडक्ट उतारते हैं। पिछले कुछ साल में मजबूत नींव रखने के बाद अब हमारा ध्यान कारोबार को फैलाने पर है।" उन्होंने कहा कि तीन साल में जीप और सिट्रॉएन के 12 लॉन्च बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी काफी बढ़ाएंगे। गहरे स्थानीय उत्पादन और मजबूत बिक्री व सर्विस नेटवर्क के साथ ग्राहकों को अलग-अलग सेगमेंट और पावरट्रेन में ज्यादा विकल्प मिलेंगे।
यह अगला दौर भारत में अब तक लगाए गए 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा (1 अरब यूरो से ज्यादा) के निवेश पर टिका है। स्टेलँटिस फिलहाल महाराष्ट्र के रांजणगाव और तमिलनाडु के तिरुवल्लूर व होसूर में तीन प्लांट चलाती है। बेंगलुरु में इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर क्षमता, हैदराबाद में आईसीटी मौजूदगी और देसी सप्लायरों का बढ़ता नेटवर्क भी काम कर रहा है।
जीप नए प्रोडक्ट और एडवांस पावरट्रेन के साथ कई सेगमेंट में पैर फैलाकर प्रीमियम एसयूवी में अपनी जगह मजबूत करेगी। सिट्रॉएन भारतीय ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से बनी, अलग पहचान वाली गाड़ियों से आम और ज्यादा बिकने वाले सेगमेंट में उतरेगी, जहां आराम, डिजाइन और टेक्नोलॉजी पर खास जोर रहेगा।
आने वाला पोर्टफोलियो मल्टी-एनर्जी रणनीति पर चलेगा, जिसमें कार्यक्षम इंटर्नल कम्बशन इंजन, हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड (पीएचईवी) और बैटरी-इलेक्ट्रिक (बीईवी) तकनीक होगी। पावरट्रेन ग्राहकों की जरूरत, किफायत, नियम, इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता और हर सेगमेंट के आर्थिक गणित के आधार पर तय होंगे।
कंपनी जीप और सिट्रॉएन का साझा नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है और बिक्री, सर्विस, स्पेयर पार्ट्स और मालिकाना अनुभव पर जोर दे रही है। स्टेलँटिस ब्रांड हाउस फॉर्मेट उन दूसरी और तीसरी/चौथी श्रेणी के शहरों के बाजारों में विस्तार को सहारा देगा, जहां यह कारोबारी तौर पर चल सकता हो। स्थानीयकरण को प्राथमिकता मिलेगी और दोनों ब्रांड में 90 प्रतिशत स्थानीय स्तर पाने का लक्ष्य है।
भारत ग्रुप के लिए एक्सपोर्ट हब की बड़ी भूमिका भी निभाएगा। स्टेलँटिस अभी भारत से करीब 50 देशों को निर्यात करती है, और होसूर प्लांट में बनने वाले इंजन व गियरबॉक्स का अंदाजन 95 प्रतिशत हिस्सा निर्यात होता है। फास्टलेन 2030 में भारत में विकसित गाड़ियां देश और विदेश के बाजारों के लिए एक्सपोर्ट करने की योजना है। हर प्रोडक्ट, पावरट्रेन और लॉन्च के वक्त की जानकारी संबंधित बाजार में पेशकश के करीब बताई जाएगी।