सूखी भीमा नदी से रात में रेत चोरी का आरोप, पंढरपुर के गांवों में लोग नाराज
पंढरपुर तालुका में भीमा नदी के कोरे पड़ने के बीच रात और सुबह तड़के अवैध रेत खनन और ढुलाई का आरोप है।
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बारिश न होने की वजह से भीमा नदी का पात्र सूख गया है। इसी बीच नदी में रेत चोरों के सक्रिय होने का आरोप लग रहा है। पंढरपुर तालुका के नदी किनारे के कई गांवों के लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में और सुबह तड़के बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और ढुलाई चल रही है।
एक तरफ सूखे की मार से लोग पानी के लिए परेशान हैं। दूसरी तरफ सूखी पड़ी भीमा नदी की रेत निकाली जा रही है। इस वजह से प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
उजनी बांध से भीमा नदी में पानी छोड़ने की मांग हो रही है। ठीक उसी वक्त नदी से खुलेआम रेत बाहर निकाले जाने का आरोप है। लोगों के मुताबिक रात में गाड़ियां नदी में उतरती हैं, रेत निकाली जाती है और फिर उसकी ढुलाई की जाती है। लोग पूछ रहे हैं कि जब यह सब चल रहा है, तो क्या राजस्व विभाग और पुलिस को इसकी खबर नहीं मिलती, या खबर होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती।
लोगों का कहना है कि अवैध खनन से सरकार के राजस्व का नुकसान तो हो ही रहा है, नदी के कुदरती पात्र और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए मांग उठ रही है कि पुलिस अधीक्षक अतुल कुलकर्णी एक विशेष टीम बनाएं और रात की गश्त बढ़ाएं। साथ ही जिलाधिकारी राजस्व विभाग को साफ निर्देश दें और नदी किनारे के गांवों में सख्त कार्रवाई हो।
नदी की रेत सिर्फ राजस्व का जरिया नहीं है। यह नदी के कुदरती बहाव और पर्यावरण के संतुलन के लिए भी अहम है। बड़े पैमाने पर रेत निकलने से नदी की गहराई और बनावट बदल सकती है। आगे चलकर इसका असर पानी के भंडारण और भूजल के पुनर्भरण पर पड़ने की आशंका है। इसलिए लोगों की मांग है कि अवैध खनन करने वालों पर सिर्फ जुर्माना लगाकर न छोड़ा जाए। संबंधित विभाग नियमित गश्त करें और संदिग्ध जगहों पर छापे मारें।
नदी किनारे के गांवों में तलाठी और पुलिस पाटील की स्थानीय स्तर पर अहम भूमिका होती है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर रात में गाड़ियां नदी से आ-जा रही हैं, तो स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं मिलती। उनका यह भी सवाल है कि इन गांवों में पुलिस पाटील अवैध रेत खनन के बारे में आगे क्यों नहीं आते। लोगों की मांग है कि वरिष्ठ अधिकारी इसकी जांच करें और जिम्मेदारी तय करें।
सूखे के बीच रेत खनन में तेजी आने का आरोप है। लोगों की मांग है कि प्रशासन सिर्फ पंचनामे और कागजी कार्रवाई तक न रुके, बल्कि नदी में उतरकर असल कार्रवाई करे। वे चाहते हैं कि चोरी होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसा असरदार इंतजाम खड़ा किया जाए कि चोरी हो ही न सके।