रविवार, 11 अक्टूबर 2026

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20:55 IST

सीजेपी आंदोलन का असर मुंबई में, शिवसेना भवन के बाहर पुलिस से तनातनी

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के समर्थन में मुंबई में युवा सेना की तैयारी के बीच पुलिस ने इजाज़त नहीं दी और दादर में तनाव फैल गया।

सीजेपी आंदोलन का असर मुंबई में, शिवसेना भवन के बाहर पुलिस से तनातनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का आंदोलन चल रहा है और उसकी गूंज अब मुंबई में भी सुनाई दे रही है। यह आंदोलन केंद्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर है। इसी मांग के समर्थन में मुंबई में युवा सेना ने आंदोलन की तैयारी की थी। लेकिन पुलिस ने इजाजत देने से मना कर दिया और कार्यकर्ताओं को पकड़ना शुरू किया, जिसके बाद दादर के शिवसेना भवन इलाके में तनाव बन गया।

दिल्ली में सीजेपी की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। जानकारी के मुताबिक आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद यह मुद्दा चर्चा में आया और मुंबई में भी इसका असर दिखने लगा। दिल्ली की तरह मुंबई के दादर में छत्रपति शिवाजी पार्क इलाके में भी आंदोलन की अपील की गई थी। मुंबई पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। आंदोलन के लिए आने वाले कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में लेने लगी।

शिवसेना भवन के बाहर युवा सेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आंदोलन के लिए जमा हो रहे थे। बताया गया कि इसका मकसद सीजेपी के आंदोलन को समर्थन देना था। पुलिस ने धरपकड़ शुरू की तो माहौल गरम हो गया। शिवसैनिकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शिवसेना भवन में घुसने की कोशिश की। खबर है कि इलाके में पुलिस और शिवसैनिकों के बीच जोरदार बहस हुई। वहां भारी पुलिस बल लगाया गया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

हिरासत में लिए गए शिवसैनिकों को छुड़ाने के लिए शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे और तेजस ठाकरे सड़क पर उतरे। खबर है कि आदित्य ठाकरे ने पुलिस की गाड़ी रोक ली और रुख अपनाया कि हिरासत में लिए गए शिवसैनिक छूटने तक गाड़ी आगे नहीं जाने देंगे। यह भी बताया गया कि वे खुद पुलिस की गाड़ी पर चढ़ गए। इस दौरान आदित्य ठाकरे ने चेतावनी दी कि नागरिकों को हाथ लगाया गया तो जैसे को तैसा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी आंदोलन शांत है। उधर शिवाजी पार्क में पुलिस सीजेपी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले रही थी, तब अमित ठाकरे उनकी मदद के लिए पहुंचे।

शिवाजी पार्क इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात है। वहां जाने वाले मुख्य रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और आने वाले लोगों से कड़ी पूछताछ हो रही है। कुछ युवाओं ने आरोप लगाया कि सिर्फ प्रदर्शनकारियों को ही नहीं, बल्कि दूसरे कामों से आए लोगों को भी हिरासत में लिया गया। उनके मुताबिक कुछ लोग घूमने आए थे और कुछ नौकरी से घर लौट रहे थे। इन युवाओं का दावा है कि उन्होंने खुद को प्रदर्शनकारी न होना बताया, फिर भी पुलिस ने बात नहीं सुनी और कोई जानकारी दिए बिना हिरासत में ले लिया।

मनसे नेता संदीप देशपांडे ने गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शिवाजी पार्क के आंदोलन में दंगा करवाने की पुलिस की योजना थी। देशपांडे के आरोप के मुताबिक भाजपा के एक पदाधिकारी ने शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में स्थानीय नागरिकों की बैठक ली थी। उनका दावा है कि इस बैठक में प्रदर्शनकारियों को रोकने, उनका विरोध करने और उन पर चढ़ जाने को कहा गया और बदले में सुरक्षा का भरोसा दिया गया। देशपांडे ने कहा है कि उनके पास इन आरोपों के सबूत हैं। हालांकि ये आरोप अलग से साबित नहीं हुए हैं।

शिवसेना विधायक महेश सावंत ने भी पुलिस को साफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि शिवसेना भवन निजी संपत्ति है और वहां घुसने की कोशिश न की जाए। सावंत के मुताबिक देश में वोट देने के अधिकार को लेकर चिंता पैदा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वोट का अधिकार छीन रही है और इसलिए नागरिक सड़क पर उतर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन करने वालों के बजाय घूमने या खरीदारी के लिए निकले लोगों को भी उठाकर गाड़ी में बैठाया जा रहा है। सावंत ने कहा कि जो सच में आंदोलन कर रहे हैं, कार्रवाई सिर्फ उन्हीं पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस का काम सड़क पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, और आदित्य ठाकरे के मौके पर आने के बाद उनकी भूमिका के मुताबिक आगे का आंदोलन होगा।

आगे क्या होगा, यह अब घटनाक्रम पर टिका है। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं का क्या होगा, पुलिस कार्रवाई को लेकर लगे आरोपों की जांच होगी या नहीं और आंदोलन को आगे इजाजत मिलेगी या नहीं, ये सवाल अभी खुले हैं।

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