श्रीनगर में पुलिस की साइकिल रेस, डल लेक से हरवान तक करीब तीन हजार साइकिलस्वार उतरे
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जम्मू-कश्मीर पुलिस की 'पैडल थ्रू पैराडाइज साइकिल रेस 2026' में करीब तीन हजार साइकिलस्वारों ने हिस्सा लिया।
खेल, फिटनेस और सेहतमंद जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 'पैडल थ्रू पैराडाइज साइकिल रेस 2026' का आयोजन किया। यह रेस डल लेक से हरवान के रास्ते पर हुई और इसमें करीब तीन हजार साइकिलस्वारों ने हिस्सा लिया। पुलिस अतिरिक्त महानिदेशक (सशस्त्र) नितेश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रेस की शुरुआत की।
अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के साथ छोटे बच्चे भी पूरे जोश से इसमें शामिल हुए। साइकिलिंग के जरिए शरीर को तंदुरुस्त रखना, मानसिक तनाव घटाना और नौजवानों को नशीले पदार्थों की लत से दूर रखना, यही इस आयोजन का मुख्य मकसद था।
रेस में शामिल उमर हसन ने बताया कि इस आयोजन में अलग-अलग उम्र के लोग आए, बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक। उनके मुताबिक वे नियमित रूप से साइकिलिंग करते हैं और स्टैमिना बढ़ाने के साथ आगे चलकर साइकिलिंग में करियर बनाने के इरादे से इस रेस में उतरे। उन्होंने यह भी कहा कि काम की भागदौड़ और व्यस्त रूटीन के बावजूद वे पिछले एक-दो दिन से रेस की तैयारी कर रहे थे। उनकी राय है कि शारीरिक हलचल या कोई भी खेल इंसान को रोजमर्रा के तनाव से दूर रखने में मदद करता है।
'पैडल पुशर' ग्रुप के सदस्य साहिद राही ने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर में ऐसी रेस नियमित रूप से होती रहें। उन्होंने कहा कि साइकिलिंग जैसी गतिविधियों से डिप्रेशन, तनाव और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को सकारात्मक प्रेरणा मिल सकती है।
मोहम्मद रफान ने भी बताया कि वे स्टैमिना बढ़ाने और नशे से दूर रहने के लिए इस रेस में आए। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसी प्रतियोगिताएं लगातार करवाई जाएं।
प्रतियोगी जुल्फिकार अली के मुताबिक ऐसी रेस से नौजवानों को अपनी शारीरिक क्षमता साबित करने के लिए अच्छा मंच मिलता है। छोटे बच्चों को भी इन आयोजनों से प्रेरणा मिल सकती है। उन्हें भरोसा है कि साइकिलिंग रेस देखकर बच्चे आगे चलकर साइकिलिंग या दूसरे खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित होंगे।
रेस में महिलाओं ने भी बड़ी तादाद में हिस्सा लिया। ईशा बशीर ने नौजवानों से खेलों में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेल एक अच्छी आदत है और ऐसे आयोजनों से युवाओं को नशे की लत से दूर रहने में मदद मिल सकती है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की इस पहल से साइकिलिंग, सेहत, मानसिक सुकून और नशामुक्ति का संदेश दिया गया। ऐसी रेस नियमित रूप से होने पर नौजवानों को खेलों की तरफ आने का हौसला मिल सकता है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।