शिरूर कोर्ट ने दूध संस्था की अर्जी खारिज की, पूरा बिल भरे बिना बिजली कनेक्शन नहीं
निमोणे की साईप्रसाद दूध उत्पादक संस्था ने 2 करोड़ 12 लाख के बिल में से सिर्फ 5 लाख 24 हजार भरने की मांग की थी। शिरूर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने सोमवार को इसे ठुकरा दिया।
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शिरूर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने सोमवार (5 तारीख) को निमोणे (तालुका शिरूर) की मे. साईप्रसाद दूध उत्पादक संस्था की अर्जी खारिज कर दी। संस्था चाहती थी कि बिजली चोरी के मामले में तय किए गए 2 करोड़ 12 लाख 21 हजार 30 रुपये के बिल में से सिर्फ 5 लाख 24 हजार 109 रुपये भरवाकर उसकी बिजली सप्लाई फिर से चालू कर दी जाए। कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि इस ग्राहक को अब पूरी रकम भरे बिना बिजली कनेक्शन नहीं मिलेगा।
मामला महावितरण की भरारी टीम की जांच से शुरू हुआ। टीम ने 14 फरवरी 2025 को जांच की और पाया कि यह ग्राहक जैमर की मदद से बिजली चोरी कर रहा था। जांच में सामने आया कि 25 महीनों के दौरान कुल 5,00,079 यूनिट बिजली की चोरी हुई। इसी के आधार पर 2 करोड़ 12 लाख 21 हजार 30 रुपये का बिल दिया गया। इस मामले में शिरूर पुलिस स्टेशन में केस भी दर्ज किया गया है।
बिल मिलने के बाद ग्राहक ने अपनी गणना के हिसाब से सिर्फ 5 लाख 24 हजार 109 रुपये भरने का दावा किया और इतने पर ही बिजली कनेक्शन देने की मांग की। इसी मांग को लेकर वह कोर्ट पहुंचा था।
महावितरण की तरफ से एड. सचिन खंडागळे और एड. गणेश डिंबळे ने कोर्ट में दलील दी। उनका कहना था कि बिजली कानून की धारा 135 के तहत जो पूरी रकम तय की गई है, उसे भरने के बाद ही कनेक्शन फिर से जोड़ा जा सकता है। सत्र न्यायालय ने उच्च न्यायालय के एक फैसले को आधार बनाया, महावितरण की दलील मान ली और साईप्रसाद दूध उत्पादक संस्था की अर्जी खारिज कर दी।
महावितरण का कहना है कि बिजली चोरी पकड़ी जाए तो दोहरी कार्रवाई होती है। एक तरफ आपराधिक केस दर्ज होता है और दूसरी तरफ भारी जुर्माना लगता है। पैसे न भरकर कानूनी गली निकालना भी मुमकिन नहीं है। इसलिए महावितरण ने लोगों से बिजली चोरी से बचने की अपील की है। उसका कहना है कि बिजली चोरों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जाती है।
अगर आपके आसपास कहीं बिजली चोरी हो रही हो तो महावितरण के मोबाइल ऐप, वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर 1912, 1800-212-3435 और 1800-233-3435 पर जानकारी दी जा सकती है। महावितरण ने लोगों से यही अपील की है।