गोल्डमन सैक्स के अर्थशास्त्री का अनुमान, RBI जून तक तीन बार और बढ़ा सकता है रेपो रेट
गोल्डमन सैक्स के भारत के मुख्य अर्थशास्त्री शंतनु सेनगुप्ता के मुताबिक RBI जून तक ब्याज दरों में तीन बार और बढ़ोतरी कर सकता है।
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RBI ने हाल ही में रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान किया है। इस फैसले से कर्ज लेने वालों को बड़ा झटका लगा है। लेकिन यह झटका शायद एक बार का नहीं है। गोल्डमन सैक्स के भारत के मुख्य अर्थशास्त्री शंतनु सेनगुप्ता का अनुमान है कि RBI रेपो रेट को आगे तीन बार और बढ़ा सकता है।
सेनगुप्ता के मुताबिक भारतीय रिज़र्व बैंक जून तक ब्याज दरों में तीन बार और बढ़ोतरी कर सकता है। इससे कुल बढ़ोतरी 75 बेसिस पॉइंट्स हो जाएगी। इसके बावजूद सेनगुप्ता को भरोसा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि करीब 7% रहेगी।
रेपो रेट कब बढ़ सकता है, इस पर गोल्डमन सैक्स के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि RBI दिसंबर, फरवरी और अप्रैल/जून में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।
सेनगुप्ता ने 2027 के लिए एल निनो को एक खतरा बताया। उनका कहना है कि एल निनो 2023 के मुकाबले 2027 के लिए ज्यादा बड़ा खतरा है, जिसके बारे में वित्तीय बाजारों के कई खिलाड़ियों ने अभी पूरी तरह सोचा नहीं है। उनके मुताबिक इसका असर काफी गंभीर हो सकता है।
खरीफ की फसल पर एल निनो का असर कम से कम रहेगा, ऐसी उम्मीद सेनगुप्ता ने जताई। उन्हें यह भी लगता है कि फिलहाल स्टॉक का जो स्तर है, वह नजदीकी भविष्य में महंगाई का दबाव काबू में रखने में मदद करेगा। उन्होंने साफ कहा, "हमारे हिसाब से एल निनो एक खतरा है, जिसका असर बाद में ज्यादा साफ दिखेगा। जलाशयों में पानी का कम स्तर रबी यानी सर्दी की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।"
सेनगुप्ता के मुताबिक 2027 तक स्टॉक का स्तर कम होने से महंगाई और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, "2027 का एल निनो आर्थिक विकास पर बुरा असर डाल सकता है और ऊंची महंगाई की वजह बन सकता है।"
गोल्डमन सैक्स के अनुमान में कच्चे तेल का खतरा सबसे बड़ा है। उसकी कीमतें प्रति बैरल 85 से 95 डॉलर के बीच रहने की संभावना है। सेनगुप्ता ने कहा, "अगर कच्चे तेल की कीमतें सच में प्रति बैरल 100 डॉलर या उससे ऊपर रहीं, तो आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर इसका बड़ा नकारात्मक असर पड़ेगा।"
उन्होंने कहा कि इस साल आमदनी में बढ़ोतरी करीब 15 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। विदेशी निवेश का बहाव कमजोर रहा है। विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं और अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में AI से जुड़े मौकों पर ध्यान दे रहे हैं। सेनगुप्ता ने कहा, "दुनिया AI की तरफ बढ़ रही है। फिलहाल हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, वे मुख्य रूप से बाहरी हैं।"