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शिंदखेड़ा की 85 गांव पानी योजना में तेजी, 15 जनवरी तक 33 गांवों में पानी देने का निर्देश

मंत्री गुलाबराव पाटील ने मंत्रालय की बैठक में चिमठाणे और 85 गांवों की योजना के बाकी काम तय समय में पूरे करने को कहा।

शिंदखेड़ा की 85 गांव पानी योजना में तेजी, 15 जनवरी तक 33 गांवों में पानी देने का निर्देश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

धुले जिले के शिंदखेड़ा तालुका में चिमठाणे और 85 गांवों की पानी सप्लाई योजना के काम तय समय में पूरे किए जाएं और लोगों को सच में पानी मिले, ऐसा निर्देश पानी सप्लाई और स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील ने दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाली 15 जनवरी तक कम से कम 33 गांवों में पानी सप्लाई शुरू करने के लिए समय-सीमा वाला कार्यक्रम बनाया जाए और कामों में तेजी लाई जाए। पेंडिंग काम पूरे करना और पानी की किल्लत के दिनों में लोगों को राहत देना, इन दोनों को पहली प्राथमिकता देने को भी उन्होंने संबंधित विभागों से कहा।

यह निर्देश मंत्रालय में मंत्री पाटील की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिए गए। बैठक में शिंदखेड़ा तालुका की पानी किल्लत की हालत, चिमठाणे और 85 गांवों की योजना की मौजूदा स्थिति, बचे हुए काम और आगे की पानी सप्लाई की तैयारी का पूरा जायजा लिया गया। धुले के प्रभारी मंत्री जयकुमार रावल भी बैठक में मौजूद थे। विभाग के अपर मुख्य सचिव पराग जैन-नैनुटिया, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के सदस्य सचिव, जल जीवन मिशन के अधिकारी, धुले जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्राधिकरण के मुख्य अभियंता और संबंधित अभियंता, साथ ही विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी भी हाजिर थे।

योजना का काम अभी करीब 51 प्रतिशत तक हुआ है। मुख्य कुआं, पंपगृह, जलशुद्धीकरण केंद्र, बिजली कनेक्शन, साफ पानी की पाइपलाइन और वितरण व्यवस्था के कुछ काम अब भी बाकी हैं। इसलिए मंत्री पाटील ने कहा कि बचे हुए कामों की चरणबद्ध योजना बनाई जाए, सभी एजेंसियां आपस में तालमेल से काम करें और असल में पानी पहुंचाने का लक्ष्य पूरा करें।

काम में देरी की वजह से संबंधित ठेकेदार पर रोजाना करीब चार लाख रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया गया है और यह रकम वसूल भी की जा चुकी है। ठेकेदार ने यह जुर्माना कम करने की मांग की थी। इस पर मंत्री पाटील ने साफ रुख रखा कि पहले काम की रफ्तार बढ़ाई जाए और तय लक्ष्य के हिसाब से गांवों में सच में पानी सप्लाई शुरू हो। उसके बाद ही जुर्माना कम करने की मांग पर विचार होगा।

उन्होंने कहा कि योजना का फायदा 85 गांवों के लोगों को मिलना है, इसलिए देरी दूर करना जरूरी है। सिर्फ जुर्माने पर फैसला करने के बजाय असल काम की प्रगति, बचे कामों की पूर्ति और लोगों तक पानी पहुंचने की समय-सीमा को अहमियत दी जाएगी।

बैठक में मंत्री पाटील ने तालुका में आने वाली पानी किल्लत का भी जायजा लिया। अक्टूबर 2026 से जून 2027 के बीच तालुका के 116 गांवों के लिए 129 उपाय प्रस्तावित हैं और इनके लिए कुल 2 करोड़ 96 लाख 90 हजार रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इनमें बोरवेल, खास नल योजनाओं की मरम्मत, अस्थायी सप्लाई योजनाएं, कुओं का अधिग्रहण और गहरीकरण और टैंकर से पानी सप्लाई जैसे उपाय शामिल हैं। योजना के काम पूरे होने तक लोगों को पानी की किल्लत का परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए संबंधित विभाग जरूरी कार्रवाई करें, ऐसा निर्देश भी मंत्री पाटील ने दिया।

योजना के मुख्य कामों के लिए जरूरी बिजली सप्लाई उपलब्ध कराना, जलशुद्धीकरण केंद्र की मशीनरी और बिजली कनेक्शन का काम पूरा करना, बाकी पाइपलाइन बिछाना और रेलवे व सड़क पार करने से जुड़े काम निपटाना जरूरी है। कुछ जगहों पर पाइपलाइन के रास्ते की स्थानीय अड़चनें भी दूर करनी होंगी। मंत्री पाटील ने कहा कि इन सब बातों को देखकर कामों की प्राथमिकता तय की जाए और तय समय में काम पूरे करने के लिए नियमित रिव्यू लिया जाए।

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