सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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शेयर बाजार में भारी गिरावट, एक दिन में 10 लाख करोड़ रुपये डूबे; निफ्टी और टूटने का अंदेशा

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट जारी है, स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर सबसे ज्यादा पिटे हैं और जानकारों को आगे भी कमजोरी का डर है।

शेयर बाजार में भारी गिरावट, एक दिन में 10 लाख करोड़ रुपये डूबे; निफ्टी और टूटने का अंदेशा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से लगातार बड़ी गिरावट चल रही है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों नीचे आए हैं, लेकिन सबसे बुरा हाल स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों का है। इस मंदी से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। सिर्फ एक दिन में उनके करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

कई बड़ी ब्रोकरेज फर्मों और जानकारों का कहना है कि यह दौर यहीं खत्म नहीं होगा। उनके मुताबिक आने वाले कुछ महीनों में बाजार की हालत और खराब हो सकती है।

टेक्निकल जानकारों ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें चिंता जताई गई है। उनके मुताबिक अगर निफ्टी 22,000 का अहम स्तर तोड़ देता है और उसके नीचे टिक जाता है, तो अगले तीन महीनों में एनएसई निफ्टी में 1500 से 1600 पॉइंट की और गिरावट आ सकती है। अगर यह अंदाजा सही निकला तो निफ्टी आने वाले कुछ महीनों में सीधे 21,000 के स्तर तक पहुंच सकता है। अभी बाजार के लिए 22,550 से 22,180 का लेवल बहुत निर्णायक माना जा रहा है। अगर बाजार इस लेवल से संभल नहीं पाया, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

शुक्रवार की गिरावट के पीछे चार बड़ी वजहें बताई जा रही हैं, कुछ दुनिया भर की और कुछ देश के भीतर की।

पहली वजह कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल है। ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। बाजार पर इस वक्त सबसे बड़ा दबाव इसी का है। सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले और लाल सागर के पास बाब-अल-मंदेब के अहम समुद्री रास्ते पर बढ़ते तनाव से तेल की सप्लाई में बड़ी रुकावट आई है। भारत अपनी जरूरत का तेल बड़े पैमाने पर बाहर से मंगाता है। तेल महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ता है, कंपनियों की उत्पादन लागत चढ़ती है और बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ता है।

दूसरी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली है। वे भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने बड़ी मात्रा में शेयर बेचे हैं। एक ही दिन में हजारों करोड़ रुपये के शेयर बिके, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और भाव गिरे। देशी संस्थागत निवेशकों यानी DII ने खरीदारी की कोशिश की, फिर भी FII की भारी बिकवाली का बोझ उठाना उनके लिए मुश्किल रहा।

तीसरी वजह मिडकैप और स्मॉलकैप में आया बड़ा झटका है। यह मंदी सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। लार्ज कैप के मुकाबले स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर ज्यादा टूटे हैं। निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 4 फीसदी और निफ्टी मिडकैप 100 करीब 3 फीसदी गिरा। जानकारों के मुताबिक इससे पहले कई छोटी कंपनियों के शेयर अपनी बुनियादी कीमत (Fundamentals) से काफी ज्यादा फूल गए थे, इसलिए करेक्शन आना तय था।

चौथी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व और ऊंची ब्याज दरों का डर है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से अमेरिका में फिर महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। ऐसे में अमेरिका का केंद्रीय बैंक यानी US Fed अपनी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है। ब्याज दर ज्यादा हो तो सुरक्षित निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलता है और निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालने लगते हैं।

बाजार की मौजूदा हालत के आंकड़े भी कमजोरी दिखाते हैं। एक ही सत्र में निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खत्म हो गई। बाजार के उतार-चढ़ाव को नापने वाला इंडिया VIX 8 फीसदी बढ़कर 17 के ऊपर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि आगे भी बाजार में उठापटक और अनिश्चितता रह सकती है। सिर्फ 24 फीसदी शेयर अपने 50 दिन के मूविंग एवरेज (DMA) के ऊपर कारोबार कर रहे हैं, जबकि 22 फीसदी शेयर 2000 DMA के नीचे चले गए हैं। इससे बाजार की चौड़ाई काफी कमजोर हो गई है।

जानकारों का कहना है कि 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा कच्चा तेल देश की अर्थव्यवस्था और बाजार, दोनों के लिए बहुत बुरी खबर है। हालांकि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में आई कमी और रुपये की स्थिति से कुछ राहत मिल सकती है।

टेक्निकल एनालिस्टों के मुताबिक निफ्टी को संभलने के लिए शुरू में 22,800 के ऊपर टिके रहना जरूरी था। अगर निफ्टी ने यह स्तर पार किया, तो शॉर्ट कवरिंग के जरिए बाजार में फिर तेजी आ सकती है। नहीं तो मंदी का साया बना रह सकता है।

शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन होता है। यह जानकारी सिर्फ पढ़ने-समझने के लिए है। कोई भी निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

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